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Women's day: पहला शव देखकर खाना नहीं खाया, फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर सरोज अब कर चुकी साढ़े 11 हजार शवों की जांच

Wed, 08 Mar 2023 09:05 AM IST
नवीन दलाल विजेंद्र कौशिक, रोहतक (हरियाणा)

सार

सोनीपत जिले के थाना कलां गांव की निवासी डॉक्टर सरोज दहिया ने गृह मंत्रालय के अधीन फाॅरेंसिक विभाग में नौकरी शुरू की। वह अपने पहले केस की जांच करने वाली फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर सरोज दहिया तीन दिन तक सही से खाना नहीं खा सकी थीं मगर इसे चुनौती मानते हुए उस हालात से वो जल्द उबरीं और कर्मपथ पर आगे बढ़ीं।
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डॉक्टर सरोज दहिया - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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2005 में पानीपत जिले के समालखा में एक कुएं के अंदर से एक सड़ा-गला महिला का शव निकाला गया। उसके अंदर कीड़े चल रहे थे। अपने पहले केस की जांच करने वाली फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर सरोज दहिया तीन दिन तक सही से खाना नहीं खा सकी थीं मगर इसे चुनौती मानते हुए उस हालात से वो जल्द उबरीं और कर्मपथ पर आगे बढ़ीं।अब तक करीब साढ़े 11 हजार शवों की वह जांच कर चुकी हैं।

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आत्महत्या व आगजनी से लेकर हादसों में घटनास्थल पर ढूंढने पड़ते हैं सबूत
अमूमन नारी ह्दय को करुणा और ममता की मूरत के रूप में देखा जाता है। नारी सशक्तीकरण का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि महिला फॉरेंसिक एक्सपर्ट अपने ह्दय को कठोर कर शव की जांच के दौरान वो सबूत ढूंढती हैं जो गुनहगारों को सलाखों तक पहुंचा सके। मूलरूप से सोनीपत जिले के थाना कलां गांव की निवासी डॉक्टर सरोज दहिया ने गृह मंत्रालय के अधीन फाॅरेंसिक विभाग में नौकरी शुरू की।

उनका कार्य हत्या, आत्महत्या, आगजनी व उन सड़क हादसों के घटनास्थल से फाॅरेंसिक सबूत ढूंढना होता है, जहां पुलिस यह अंदाजा नहीं लगा सकती कि मौत हत्या है या हादसा। दहिया ने बताया कि जब बेटा 11 साल का हुआ तो उसने सबसे पहले कहा, मां आपकी नौकरी सबसे अलग है। मुझे मां पर नाज है। यूं आगे बढ़ती रहना। अब नौकरी के 18 साल पूरे हो गए हैं। जिला प्रशासन के साथ डीजीपी तक सम्मानित कर चुके हैं।
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भावनाओं को काबू में रखकर सोचती हूं, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय दिला सकूं

डॉक्टर दहिया ने बताया कि वह भी सामान्य महिला हैं, लेकिन जब घटनास्थल पर जाती हूं तो बद से बदतर हालात मिलते हैं। मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हालत होता है। कभी तो शव की हालत इतनी खराब होती है कि पुलिस के अधिकारी तक उल्टी कर देते हैं। मन मेरा भी खराब होता है, लेकिन भावनाओं को काबू कर सबूत ढूंढती हूं ताकि पीड़ित परिवार को न्याय दिला सकूं।

डीजीपी तक कर चुके हैं सम्मानित

डॉक्टर सरोज दहिया - फोटो : सोशल मीडिया
महिला फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर सरोज दहिया को डीजीपी तक सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें न केवल घटनास्थल से सबूत जुटाने पड़ते हैं बल्कि अदालत में गवाही भी देनी होती है। पूरे जिले में एक ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट होता है। ऐसे में 24 घंटे किसी भी समय घटनास्थल पर पहुंचना पड़ता है।

केस नंबर एक : एक चूड़ी के मामूली टुकड़े ने चाची को पहुंचा सलाखों के पीछे

फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि साल 2010 में सोनीपत जिले के खरखौदा के पास एक गांव में झाड़ियों में पांच साल के बच्चे का शव मिला। शव की जांच की तो बच्चे की गर्दन के पास चूड़ी का मामूली सा लाल रंग का टुकड़ा मिला। तय हुआ कि हत्या के पीछे किसी महिला का हाथ है। नजदीक मृतक की चाची के मकान की तलाशी ली। पशु बांधने वाली जगह उपले रखे थे। देखा तो उपलों के नीचे की जमीन गीली है। पुलिस ने शक होने पर उपले हटाकर देखा तो गड्ढा मिला, जिसमें चूड़ी के और टुकड़े मिले। मृतक की चाची से सख्ती से पूछताछ की तो राज खुला कि किसी तांत्रिक के कहने चाची ने ही बच्चे की बलि दी थी।

केस नंबर दो : चाय के कप ने खोला नववाहिता की मौत का राज

साल 2015 में बहादुरगढ़ का एक युवक चंडीगढ़ की एक युवती से विवाह करके घर आ गया। घर वाले शादी को स्वीकार नहीं कर रहे थे। फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो देखा कमरे में खून के छींटे छत तक गए हुए थे। तय हुआ कि किसी भारी वस्तु से वार किया गया है। घर में मौजूद लड़की से पूछा तो उसने कहा कि चार-पांच युवकों को घर से निकलते देखा था। पता नहीं किसने हत्या की। इसी बीच घर की रसोई में चाय के चार कप मिले, जिनको साफ नहीं किया गया था साथ ही शव के पास एक कप रखा था, जिसमें चाय थी। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि हत्या से पहले विवाहिता ने परिजनों के लिए चाय बनाई। इसके बाद एक कप खुद ले गई, लेकिन उसकी चाय पीने से पहले ही सिर में सोटा मारकर हत्या कर दी गई।

केस नंबर तीन : नेपाली युवती की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या, क्रूरता की हद

रोहतक में ही आठ साल पहले एक नेपाली युवती की हत्या कर दी गई। घटनास्थल पर शव क्षत-विक्षप्त हालत में पड़ा था। कुत्तों ने दोनों हाथों को नोंच रखा था। घटनास्थल की बारीकी से जांच की तो शरीर के बाल मिले। उनको कब्जे में लेकर आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराया गया। उक्त फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर छह-सात लोगों को फांसी की सजा हुई जबकि एक ने गिरफ्तारी से पहले सुसाइड कर लिया था। एक नाबालिग आरोपी पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस चला। उन्होंने बताया कि अब तक के कार्यकाल में यह ऐसा केस रहा, जिसमें सबसे ज्यादा क्रूरता की गई थी।
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केस नंबर चार : मिट्टी के मिलान से खुला ऑनर किलिंग का केस

डॉक्टर दहिया ने बताया कि 2017 में सूचना मिली कि रोहतक की वैश्य संस्था के नजदीक प्राचीन शिव मंदिर श्मशान में एक चिता जल रही है। हत्या के बाद बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार किया जा रहा था। पुलिस ने तत्काल अधजले शव को बाहर निकाला। लड़की के हाथ की एक अंगुली में रिंग थी। तय हुआ कि शव लड़की का है। शव पर मिट्टी लगी हुई थी। मिट्टी का आरोपियों के घर की मिट्टी से मिलान कराया गया साथ ही बालों का डीएनए टेस्ट हुआ। दोनों सबूत केस में अहम साबित हुए और केस ऑनर किलिंग का निकला।
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