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बगैर परीक्षा प्रमोट करने से नुकसान तो होगा, मगर भविष्य को बचाने के लिए निर्णय सही

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कोरोना महामारी व लॉकडाउन के चलते बीच में रोकी गई सीबीएसई व आईसीएसई की 10वीं व 12वीं कक्षा की परीक्षा अब नहीं होगी। इन बोर्डों ने बगैर परीक्षा लिए पिछले तीन वर्ष के मूल्यांकन के आधार पर परिणाम जारी करने का फैसला लिया है। इस फैसले को शिक्षाविदों, प्राचार्यों व शिक्षकों ने आने वाले समय में नुकसानदायक बताते हुए संक्रमण काल में बच्चों को बचाने के लिए यह फैसला सही ठहराया है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि बच्चे ही देश का भविष्य है। इन्हें बचाने के लिए कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ना जरूरी है। शिक्षण संस्थानों में प्रवेश को लेकर आने वाली दिक्कतों के लिए गाइड लाइन में बदलाव की जरूरत पड़ेगी। अमर उजाला ने विद्यार्थियों, प्राचार्यों, शिक्षकों व शिक्षाविदों से बातचीत की तो यह सच सामने आया।
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परिणाम जारी करने को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिणाम जारी करते समय शिक्षक से बच्चों की रिपोर्ट लेनी चाहिए। नए व्यवस्था में 45 से 85 अंक वाले एक जगह आ सकते हैं। मेधावी व सामान्य विद्यार्थी की पहचान जरूरी है। नोन अटेंडिंग विद्यार्थी परेशानी खड़ी करेंगे। ऐसे में बच्चों का ध्यान रखा जाए।
जसबीर धनखड़, पूर्व प्राचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एवं शिक्षाविद।
चिंता पढ़ाई की हो, परीक्षा की नहीं। परीक्षा बगैर परिणाम से मेधावी का करियर प्रभावित होगा। शिक्षा जगह पर कई साल तक महामारी के लिए फैसले का असर रहेगा। कमियां रहेंगी। विद्यार्थी विज्ञान, वाणिज्य या कला किस संकाय में जाएगा। यह अस्पष्ट होगा। सही विद्यार्थी को सही जगह प्रवेश मिलना भी बड़ी चुनौती रहेगा। अब छूटा विषय फिर कवर नहीं होगा।
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डॉ. वेद प्रकाश श्योराण, पूर्व प्राचार्य पं. नेकीराम शर्मा कॉलेज एवं शिक्षाविद।
परीक्षा के बगैर परिणाम जारी करने का मेधावी को नुकसान व कमजोर को फायदा होगा। परीक्षा जरूरी है। इसी से कंपीटीशन की भावना पैदा होगी। अच्छे नंबरों से विद्यार्थी का मनोबल बढ़ता है। इन कक्षाओं से ही भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर तय होते हैं। यहां से अगली कक्षा में प्रवेश के साथ ही विद्यार्थी का करियर भी लगभग तय हो जाता है।
डॉ. जेएन शर्मा, पूर्व प्राचार्य गौड़ कॉलेज एवं शिक्षाविद।
शिक्षकों ने कहा, औसत रहने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
बोर्ड के फैसले से अंकों में अंतर रहेगा। मेधावी व औसत विद्यार्थी साथ खडे़ रहने की संभावना ज्यादा है। अगली कक्षा में प्रवेश में दिक्कत आएगी। कटऑफ में कुछ निराशा हाथ आएगी। कक्षा दसवीं व बारहवीं के बाद विद्यार्थियों की स्ट्रीम तय होने के साथ करियर की भी शरुआत होती है। नीट, जेईई, पीएमटी या नौकरी के लिए प्रवेेश परीक्षा योग्यता तय करेगी।
दीपिका भुटानी, शिक्षिका, मॉडल स्कूल।
मेधावी विद्यार्थियों को नई व्यवस्था से नुकसान होगा। मेहनत से बचने वाले औसत विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना ज्यादा है। परीक्षा होनी चाहिए। परीक्षा रद्द होना दुखदायी है। बोर्ड जहां तक संभव हो ऑनलाइन व शेष की ऑफलाइन परीक्षा की व्यवस्था कर सकता था। भविष्य में इन विद्यार्थियों का चयन कैसे हो, इस पर सवाल उठ सकता है।
आरती मलिक, शिक्षिका, स्कॉलर रोजरी।
विद्यार्थियों को बगैर परीक्षा पास करने का इतना बड़ा फैसला कुछ सोच समझ कर ही लिया होगा। बच्चे देश का भविष्य हैं। इन्हें महामारी से बचाने के लिए कोरोना की चेन तोड़ना जरूरी है। नई व्यवस्था के तहत बदलाव आया है तो नई गाइड लाइन की जरूरत भी पड़ेगी। अगली कक्षा में प्रवेश संबंधी दिक्कत आ सकती है। ऐसे में नई गाइड लाइन राहत दे सकती हैं।
दिव्या, शिक्षिका, एमडीएन स्कूल।
कक्षा 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं अब टल गई हैं। सीबीएसई ने पिछली तीन परीक्षा के आधार पर अंक देने का फैसला लिया है। आईसीएसई की मार्किंग स्कीम बाद में जारी होगी। महामारी काल में अभिभावकों व परीक्षार्थियों के लिए यह फैसला सही है। परीक्षाएं कराने की स्थिति अनुकूल नहीं हैं। यदि अभी रिजल्ट जारी नहीं किया जाता है तो विद्यार्थी दसवीं व बारहवीं की पढ़ाई पर ही केंद्रित रहेंगे।
अल्का मदान, शिक्षिका, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
हालात को देखते हुए जो बोर्ड को सही लगा, वही विकल्प चुना है। दसवीं के तो सभी मुख्य विषय के एग्जाम हो ही गए थे, सिर्फ आईटी का ही पेपर रहता है। जो एग्जाम हो चुके थे, उसी के आधार पर जो पेपर रह गए हैं उनमें नंबर लगाए जाएंगे। सीबीएसई ने बारहवीं के बच्चों को रियायत दी है, अगर बच्चे संतुष्ट नहीं हैं तो दोबारा एग्जाम दे सकेंगे। 12वीं में कॉमर्स में बिजनेस स्टडी और आर्ट्स में जियोग्राफी, समाजशास्त्र, हिंदी का पेपर रहता था। इसे बच्चे दोबारा दे सकेंगे।
- डॉ. अरुणा तनेजा, प्रधानाचार्या, मॉडल स्कूल
मौजूदा हालात को देखते हुए बोर्ड का निर्णय बिल्कुल सही है। कोरोना पॉजिटिव की संख्या देशभर में बढ़ती जा रही है। ऐसे में बच्चों को एग्जाम्स के लिए स्कूलों में बुलाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल रहता। ऐसे में बोर्ड का यह फैसला बच्चों के हित में है। जो बच्चे परिणाम से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें दोबारा एग्जाम देने का मौका भी मिलेगा। इससे बच्चे आगे कॉलेजों में दाखिला ले सकेंगे।
- हरिकिशोर सिंह, प्रधानाचार्या, डीएवी स्कूल
महामारी के इस दौर में एग्जाम देना मुमकिन नहीं था। बोर्ड ने 12वीं के बच्चों के लिए ऑप्शन भी रखा है। अब उनके पास एक मौका है, वह संतुष्ट न होने पर दोबारा पेपर दे सकेंगे। बोर्ड ने बिल्कुल सही तरीका निकाला है। अगर अब कोई फैसला नहीं लिया जाता तो बच्चों का पूरा एक साल बर्बाद हो जाता। क्योंकि अब कॉलेजों के दाखिलें शुरू हो जाएंगे। इस गैप की वजह से बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर होता है।
- अंशुल पठानिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, पठानिया स्कूल
महामारी से सुरक्षा सबसे पहले है। सिर्फ आईटी का एग्जाम देना बाकी था। पांच मुख्य विषयों के एग्जाम हो चुके हैं, सभी ने अपनी बेहतर परफॉर्मेंस दी है। आईटी हमारा एडिशनल सब्जेक्ट है, तो इससे कोई ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ेगा। यह सिर्फ हमारी एक्सट्रा नॉलेज के लिए है।
- तृष्या सोनी, 10वीं कक्षा, स्कॉलर्स रोजरी स्कूल
एग्जाम कैंसल नहीं होने चाहिए। ऐसे में बच्चों की मेहनत का पता नहीं चल पाएगा। इससे कमजोर बच्चों और टॉपर्स बच्चों के बीच कोई फर्क नहीं रह जाएगा। हालांकि जिनके पेपर नहीं हुए हैं उन्हें सीधे तौर पर फायदा होगा और सामूहिक परिणाम के चक्कर में अच्छे बच्चे भी पिसेंगे।
- तनिषा राठी, 10वीं कक्षा, मॉडल स्कूल
हमारे मुख्य सभी सब्जेक्ट के पेपर हो चुके थे, लेकिन एडशिनल सब्जेक्ट कंप्यूटर का पेपर रहता है। अगर उसका पेपर होता तो, जिस विषय का पेपर कमजोर हुआ है उसमें कंप्यूटर के नंबर एड हो जाते। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अब एवरेज मॉर्क्स ही लगेंगे। इससे टॉपर्स बच्चों की प्रतिशत कम हो जाएगी।
- भावेश शर्मा, 10वीं कक्षा, एमडीएन पब्लिक स्कूल
यह बोर्ड की बेहतरीन पहल है, इससे बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। तीन महीने से हम घर से बाहर नहीं निकल पाएं हैं, ऐसे में एग्जाम कंडक्ट कराना बिल्कुल संभव नहीं था। बोर्ड का यह फैसला अच्छा है कि बेस्ट तीन पेपरों के नंबरों के आधार पर ही रिजल्ट बनाया जाएगा। अगर किसी सब्जेक्ट के नंबरों से बच्चे संतुष्ट नहीं है तो उसे वह दोबारा दे सकते हैं। यहां बात नंबरों से ज्यादा सेफ्टी की है।
- अनन्या साहू, 12वीं कक्षा कॉमर्स, स्कॉलर्स रोजरी स्कूल
बोर्ड का रिजल्ट इस तरह से आएगा तो बोर्ड एग्जाम्स की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। डर तो है ही कि इस सामूहिक परिणाम के चक्कर में टॉपर बच्चे पिछड़ जाएंगे। इससे आगे जाकर अच्छे कॉलेजों में दाखिले लेने में भी समस्या आएगी। किसी पेपर के नंबरों से अगर बच्चा संतुष्ट नही है तो दोबारा एग्जाम देने का मौका तो मिलेगा, लेकिन कॉलेज में दाखिला पहले हो गया तो साल खराब होने का काम हो जाएगा।
- यश मित्तल, 12वीं, नॉन मेडिकल, मॉडल स्कूल
जैसे 12वीं के बच्चों को दोबारा एग्जाम देने का मौका मिलेगा वैसे ही 10वीं कक्षा के बच्चों को भी मौका मिले। एग्जमा होते तो ज्यादा अच्छा रहता। वैसे भी दोबारा एग्जाम देना कोई अहमियत नहीं रखेगा, क्योंकि तब तक बच्चों का कॉलेजों में दाखिला हो चुका होगा। जिस बच्चे का मैथ का एग्जाम अच्छा नहीं हुआ है वह बिजनेस स्टडी में उसे कंप्लीट कर सकता था, लेकिन अब मैथ के एग्जाम के आधार पर ही औसत नंबर दिए जाएंगे।
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- बिंदू बजाज, 12वीं कक्षा, कॉमर्स, एमडीएन पब्लिक स्कूल
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