पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 15 जनवरी 2018 को बालंद गांव निवासी रवि ने शिवाजी कॉलोनी थाने में शिकायत दी कि उसका व उसके भाई सचिन का पालन-पोषण नानी पताशो देवी, गांव कोट जिला झज्जर ने किया है। उसकी मां बबली देवी पिता से परेशान होकर कभी कोट गांव आ जाती तो कभी बालंद गांव में रहने लग जाती थी।
पूछने पर मां बताती थी कि तुम्हारा पिता शराब पीने का आदी है। मौसी रामभतेरी भी बालंद गांव में ही शादीशुदा है, जिसके पास ही वह अकसर आ जाता था। 20 जनवरी 2013 को उसके चाचा रमेश ने सूचना दी कि उसकी मां बबली 19 जनवरी से लापता है। वह नाना के घर से गांव बालंद पिता के पास आया, लेकिन मां बबली का कहीं सुराग नहीं लग सका। उसका पिता राजकुमार, सतबीर व चाचा राजबीर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने चले गए।
पांच साल बाद फिल्मी स्टाइल में खुला हत्या की राज
पुलिस के मुताबिक 2018 में सतबीर ने शिवाजी कॉलोनी थाने में शिकायत दी कि 2002 में राजकुमार ने उससे साढ़े 22 हजार रुपये उधार दिए थे। 14 जनवरी 2018 को जब वह पैसे मांगने गया तो राजकुमार ने कहा कि मुझसे पैसे मांगने का मजा चखाता हूं।
इतना कहते ही सोटे से उसे पीटना शुरू कर दिया। किसी तरह उसके बेटे ने उसे पीजीआई में दाखिल कराया। पुलिस ने सतबीर के बयान पर राजकुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 व 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
जब पुलिस ने राजकुमार से थाने में पूछताछ शुरू की तो उसने खुलासा किया कि 2013 में उसकी पत्नी बबली लापता नहीं हुई, बल्कि उसने अपने चचेरे भाई सतबीर के साथ मिलकर हत्या की थी। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने राजकुमार के बेटे की शिकायत पर आरोपी से पूछताछ की।
राजकुमार ने पुलिस को बताया कि उसकी बबली से नहीं बनती थी। दोनों में झगड़ा रहता था। वह और सतबीर बबली को बहका कर बालंद गांव के नजदीक नहर के पुल पर ले गए। वहां दोनों ने मिलकर बबली की गला दबाकर पहले हत्या की फिर शव को नहर में फेंक दिया। साथ ही सदर थाने में बबली के लापता होने की शिकायत दर्ज करवा दी।
जमानत पर थे आरोपी, पुलिस ने लिया हिरासत में
मामले की जांच कर रही शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस ने राजकुमार और सतबीर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से पहले न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई। वीरवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों को हत्या का दोषी करार दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।