जाट आरक्षण आंदोलन के बाद मचे उपद्रव ने शहर की खुशियों को राख कर दिया है। अब जले हुए शहर पर सरकार और विपक्ष सियासी मरहम लगाने पहुंचने लगा है। मंगलवार को शहरवासियों का दर्द सुनने आए सीएम मनोहर लाल खट्टर को उन्हीं के गृह जिले के पीड़ितों ने घेर लिया। भारी भरकम सुरक्षा के बीच हेलिकाप्टर से रोहतक पहुंचे सीएम को दंगा पीड़ितों ने काले झंडे दिखाए और भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए।
पूछा कि जब शहर जल रहा था और लोग मर रहे थे, उस समय सीएम कहां थे। पुलिस और फोर्स लोगों को मरते हुए देखते रही, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। भीड़ ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के समर्थन में विज जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
सीएम बोलते रहे लेकिन पीड़ितों का उलाहना खत्म नहीं हुआ। जब वे वापस जाने लगे तो लोगों ने उनकी कार को घेर लिया। सुरक्षा में लगे जवानों ने भीड़ को पीछे हटाना चाहा तो भीड़ ने फोर्स और पुलिस जवानों को जमकर खरीखोटी सुनाई और कहा कि जब शहर जल रहा था तब वे कहां थे।
रोहतक में हुए जातिगत संघर्ष के एक सप्ताह बाद मंगलवार दोपहर 12 बजे सीएम मनोहर लाल खट्टर हेलिकाप्टर से रोहतक पहुंचे। पुलिस लाइन से उन्हें कैनाल रेस्ट हाउस तक भारी भरकम फोर्स के काफिले के साथ कड़ी सुरक्षा में लाया गया। स्थिति यह थी कि सीएम की कार रेस्ट हाउस के अंदर थी और सुरक्षा गाड़ियां मॉडल स्कूल तक खड़ी थीं। इसे देखकर शहरवासियों का क्रोध और बढ़ गया।
लोगों में रोष था कि अब जब फोर्स तैनात हो गई है तो सीएम इतने बडे़ सुरक्षा तंत्र में पहुंचे हैं, जबकि शहर को कर्फ्यू के बीच मरने के लिए छोड़ दिया गया। पुलिस और जिला प्रशासन की नाकामी को लेकर सभी आक्रोश में थे। सीएम से मिलने के लिए उन्हें ग्रिल के पीछे खड़ा किया गया था, लेकिन कई लोग ग्रिल कूद कर आगे आ गए। सीएम मंच से मुआवजे व सहायता की घोषणा करते रहे, लेकिन जनता के सवालों में उनकी आवाज दब गई।
सीएम से मिलने वालों में भी पक्षपातसीएम से अपना दुख बताने वालों की कैनाल रेस्ट हाउस में लंबी कतार थी। लेकिन उनसे खास लोगों को ही मिलने दिया गया। इस पर कई लोगों ने आपत्ति भी जताई। सीएम को कई बार लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उपद्रवियों को सिर पर बैठाया, अब जनता को पीछे हटा रहे होपुलिस प्रशासन की नाकामी से आहत शहरवासियों ने पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई। पुलिस उन्हें पीछे हटा रही थी तो जनता ने भी सीधा जवाब दिया कि पुलिस बोलने लायक नहीं है। उनका काम बस सीधे साधे लोगों का सड़क पर चालान काटने तक है। इसी बीच जब फोर्स ने बीच में हस्तक्षेप करना शुरू किया तो उन्हें भी तीखी आलोचना झेलनी पड़ी। लोगों ने कहा कि आज वे भी सख्ती दिखा रहे हैं, जब उनके आगे मारकाट व लूटपाट हो रही थी तो फोर्स ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। उपद्रवियों को प्रशासन ने सिर पर क्यों बैठा लिया था। क्या सारे आदेश आमजन को दबाने के लिए ही हैं।