रोहतक। मानसून की बेरुखी आम और खास सभी को अखरने लगी है। उमस वाली गर्मी पसीने छुड़ा रही है। बिन बरसे लौट रहे बदरा किसानों के अरमानों को सूखा रहे हैं। बारिश के अभाव में सूखने की कगार पर धान को पानी की दरकार है। ऐसे में नहरी पानी चोरी करने को किसान विवश हो गए हैं। यही वजह है इन दिनों रोजाना औसतन 50 से 60 नहरी पानी चोरी के मामले सामने रहे हैं। सिंचाई विभाग इन मामलों को गंभीरता से ले रहा है। पानी चोरी पर अंकुश लगाने के लिए कर्मचारी रात मे भी नहरों पर पहरा दे रहे हैं।
अबकी बार मानसून का तीसरा सप्ताह गुजरने को है, लेकिन जिले में सामान्य से भी कम बारिश हुई है। ये भी कह सकते हैं कि रोहतकवासियों से मानसून रूठा हुआ है। शुरुआत में पहले दिन 55 एमएम बारिश के बाद से इलाका सूखा पड़ा है। घुमड़-घुमड़कर बरसने वाले बदरा अबकी बार बैरंग लौट रहे हैं। बूंदाबांदी भी इस तरह होती है कि आधा शहर सूख रहता है। ऐसे में धान की फसल लेने वाले किसानों के चेहरे पर शिकन साफ नजर आने लगी है। फसल के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण कहीं रोपाई के बाद फसल सूख गई है तो कहीं खेत ही सूखे पड़े हैं। भूजल भी नहीं है। इस कारण नहरी पानी ही विकल्प है। इस पर भी सिंचाई विभाग की नजरें जमी है। नहरी पानी पेयजल के लिए टेल तक सभी को मुहैया हो, इसके लिए विभाग के कर्मचारी दिन-रात पहरा दे रहे हैं। इसकी वजह सूखती मुर्झाती धान की फसल के लिए किसानों का नहर से पानी चोरी करना है। हालात ऐसे हैं कि जिले में रोजाना औसतन 50 से ज्यादा मामले पानी चोरी के सामने आ रहे हैं।
तवान के 100 केस दर्ज, पटवारी की रिपोर्ट पर होगी एफआईआर
सिंचाई विभाग की मानें तो नहरी पानी चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें नहर से पाइप के जरिए पानी चुराया जा रहा है। कुछ जगह जनरेटर या ट्रैक्टर जोड़कर तेजी से पानी निकाला जा रहा है। विभाग तवान के 100 केस पकड़ चुका है। तवान केस दर्ज कर पानी चुराने वाले पर जुर्माना लगाया जाता है। यह अलग-परिस्थितियों व खेत के आकार के आधार पर अलग-अलग होता है। यही नहीं, पहले पटवारी अपनी रिपोर्ट देगा, इसके बाद हरियाणा स्टेट इनफोर्समेंट ब्यूरो केस दर्ज कर संंबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
जिले में भूजल स्तर 30 से 45 फिट गहरा
भूजल स्तर को लेकर जिले की स्थिति नाजुक बनी हुई है। नहर के आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर 30 फीट है, जबकि नहर से दूर यह 45 फीट है। इससे अधिक गहराई पर पानी उपयोग करने लायक नहीं है। इसकी गुणवत्ता बेकार है। ज्यादातर पानी क्षारीय है। जिले में पिछले वर्ष 70 हजार हेक्टेयर में धान की फसल थी। फिलहाल 30 हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है।
बारिश कम होने के चलते धान की रोपाई धीमी चल रही है। फसल में पानी की जरूरत है। कम पानी स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने इस बार सीधी बीजाई का लक्ष्य 15 हजार हेक्टेयर रखा है। किसानों को प्रेरित भी किया गया है। जिले में फिलहाल 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर धान की रोपाई हो चुकी है।
सुरेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग।
प्रदेश में 36 प्रतिशत कम हुई बारिश
मानसून ट्रफ दक्षिण की तरफ बने रहने से हरियाणा में मानसूनी बारिश की गतिविधियों में कमी रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 20 जुलाई के दौरान राज्य में 94.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश (147.5 मिलीमीटर) से अब तक 36 प्रतिशत कम हुई है। मानसून के प्रवेश 1 जुलाई से अब तक राज्य के ज्यादातर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
डॉ. मदन खीचड़, विभागाध्यक्ष, कृषि मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू।
मौसम में बदलाव के कारण मानसून सीजन में बारिश नहीं हाे रही है। इस कारण किसानों की धान की फसल सूखने लगी है। सूखती फसल के लिए नहर से पानी चुराया जा रहा है। जिले में ऐसे रोजाना औसतन 50 से 60 केस मिल रहे हैं। इनमें कार्रवाई की जा रही है। बारिश आने से राहत मिलने की आस है।
अरुण मुंझाल, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
20सीटीके01... नहर से पानी का पाइप जोड़ते किसान। संवाद
20सीटीके01... नहर से पानी का पाइप जोड़ते किसान। संवाद