कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जिले की आबादी को वैक्सीन का सुरक्षा चक्र प्रदान किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 10 लाख वैक्सीन की डोज लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसमें 85 प्रतिशत आबादी को पहली डोज व 40 प्रतिशत को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने इस सफलता का श्रेय विभाग के चिकित्सकों, नर्सों व अन्य कर्मचारियों को दिया है। अब विभाग का लक्ष्य दूसरी डोज वाले लोगों को वैक्सीन लगाने का है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले में 10 लाख एक हजार 418 वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी हैं। इनमें से 6,82,164 पहली व 3,19,254 दूसरी डोज है। लोगों को वैक्सीन का सुरक्षा चक्र प्रदान करने के लिए जिले में 109 केंद्रों पर वैक्सीन लगाई जा रही है। विभाग के प्राप्त लक्ष्य के अनुसार 5,37,926 पुरुषों व 4,63,336 महिलाओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इसमें 8,61,704 को कोविशील्ड व 1,39,714 को कोवैक्सीन लगाई गई है। विभाग की इस लक्ष्य प्राप्ति में सरकारी केंद्रों के अलावा बड़े स्तर पर टीकाकरण शिविरों के आयोजन का भी सहयोग है। यही नहीं, पिछले एक महीने में करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। अब विभाग का प्रयास लोगों को दूसरी डोज लगाने का रहेगा। यह लक्ष्य जल्द हासिल करने के लिए शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा।
44 से कम उम्र के लोग वैक्सीन लगवाने में आगे
स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण अभियान की शुरुआत वृद्धों से हुई थी। शुरुआत में विभाग ने 60 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा था। इसके बाद 44 से अधिक व 60 से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाना शुरू किया गया। बाद में 18 से 44 वर्ष के बीच की उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ। अब टीकाकरण कराने में 18 से 44 आयु वर्ग वाले सबसे आगे है। विभाग के मुताबिक, इस वर्ग में सबसे अधिक 5,81,012 लोगों को टीके लग चुके हैं। इसके बाद 45 से 60 आयु वर्ग में 2,32,555 व 60 से अधिक उम्र के वर्ग में 1,87,851 लोगों को टीका लगाया जा चुका है।
कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान जारी है। विभाग ने 10 लाख डोज लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके तहत 85 प्रतिशत लोगों को पहली व 40 प्रतिशत को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। यह लक्ष्य हासिल करने में विभाग के डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारियों के अलावा आमजन का भी अहम योगदान रहा। शेष लोगों को भी जल्द ही वैक्सीन लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। - डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन