रोहतक। कोरोना महामारी की पहली व दूसरी जानलेवा लहर का खौफ बरकरार है। समाज में अनेक लोगों ने अपनों को खोया। महामारी के संक्रमण से जनता को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान शुरू किया। टीकाकरण के चलते लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी और वे महामारी से संघर्ष कर खुद को सुरक्षित रख पाए। टीकाकरण से पहले कोरोना ने गंभीर रोगों से ग्रस्त लोगों को अपना शिकार बनाया।
महामारी से संघर्ष में टीकाकरण हथियार की तरह काम आया। कोरोना की बार-बार आ रही लहर से लड़ने के लिए टीकाकरण ने लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम किया। कुछ लोगों ने तो अपने जोड़ों के दर्द, त्वचा संबंधी विकार, सिरदर्द व अन्य रोगों से निजात मिलने का भी दावा किया। हालांकि यह एक तरह की किंवदंती ही है। स्वास्थ्य विभाग के पास इस तरह का न तो कोई डाटा है न ही कोई रिकॉर्ड। हां, वैक्सीन लगाने के बाद लोग कम बीमार हुए। उनके बीमार होने के बाद ठीक होने की प्रतिशत भी ज्यादा रही। टीका लगवाने वाले किसी व्यक्ति की जान नहीं गई। टीकाकरण के चरणबद्ध रूप से चले अभियान से व्यवस्था में खासा बदलाव आया है। लोग खुद टीकाकरण के लिए आगे आने लगे। टीकाकरण में आनी वाली तकनीकी दिक्कतें दूर हुई। इन तकनीकी गड़बड़ी की वजह से शुरू में लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ी। बाद में व्यवस्था को दुरुस्त किया गया।
टीकाकरण विशेष सप्ताह चलेगा
गर्भवती महिलाओं को भी महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए टीके लगाए गए। इसके तहत पिछले महीने भी शिविर लगाए गए। अप्रैल के पहले सप्ताह में टीकाकरण विशेष सप्ताह मनाया जाएगा। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जाएंगे। इसकी सूची तैयार कर ली गई है। यही नहीं कोरोना एहतियात के साथ टीकाकरण अभियान चलाया गया। पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान भी टीकाकरण जारी रहा। इसके किसी तरह दुष्प्रभाव सामने नहीं आए।
मृतकों के डाटा को भी सुधारा
महामारी की दूसरी लहर ज्यादा भयावह रही। इसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। इस खौफ भरे माहौल में अनेक मृतकों की गिनती ही नहीं हो पाई। बाद में जांच हुई तो कुछ फाइलें पीजीआई में इधर-उधर मिली तो कुछ लोगों ने बाद में जानकारी दी। पीजीआई से भी जांच के बाद देरी से डाटा स्वास्थ्य विभाग को मिला। इसके बाद ही मृतकों का डाटा सुधर पाया। इस व्यवस्था को भी अब दुरुस्त किया गया है।
वर्जन:
कोरोना को हराने के लिए टीकाकरण कारगर हथियार साबित हुआ। इस हथियार ने न केवल संक्रमण को निष्क्रिय किया, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाई। इससे हर व्यक्ति महामारी से जूझने में समक्ष रहा। यही वजह रही कि दूसरी लहर के बाद न तो जनहानि हुई और न ही लोग ज्यादा दिन बीमार रहे। बीमार होने पर लोग पहले के मुकाबले कम समय में ही स्वस्थ हो गए। जिले में विभाग 105 प्रतिशत प्रथम व 90 प्रतिशत द्वितीय वैक्सीन डोज लगा चुका है। यह काम जारी है।
- डॉ. भंवर सिंह, नोडल अधिकारी, टीकाकरण।