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सरकारी फरमान के खिलाफ एकजुट हुए विश्वविद्यालय

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विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमले के खिलाफ सभी विश्वविद्यालय एकजुट हो गए हैं। विश्वविद्यालयों के शिक्षक, गैर शिक्षक कर्मियों और छात्रों ने इसके खिलाफ आंदोलन की तैयारी की है। यह फैसला रविवार को एमडीयू में हुई बैठक में लिया गया, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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राज्य सरकार ने 8 नवंबर को पत्र जारी किया है, जिसके अनुसार विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां अब सरकार करेगी। बैठक में फैसला लिया गया कि इसके खिलाफ सभी विश्वविद्यालयों का स्टाफ 17 नवंबर को सुबह 11 बजे अपने कुलपति को ज्ञापन देगा। 18 से 23 नवंबर सभी विश्वविद्यालयों में रोजाना सुबह 9 से 12 बजे तक प्रशासनिक भवन पर धरना दिया जाएगा, जिसमें शिक्षक, गैर शिक्षक और छात्र भी शामिल होंगे। 24 नवंबर को दोबारा एमडीयू में बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विकास सिवाच और आल हरियाणा यूनिवर्सिटी फेडरेशन के चेयरमैन दयानंद सोनी ने संयुक्त रूप से की, संचालन गैर शिक्षक संघ के प्रधान रणधीर कटारिया ने किया। वक्ताओं ने कहा कि हरियाणा सरकार विश्वविद्यालयों की नौकरियां अपने हाथों में लेना चाहती है। यह न सिर्फ विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला है, बल्कि सरकार की मंशा कुछ और नजर आ रही है। छात्र नेता विक्रम डूमोलिया ने कहा कि जल्द से जल्द बड़ा आंदोलन करने की जरूरत है। प्रो. अरुण नंदा ने सुझाव दिया कि एक ही तारीख पर सभी कुलपतियों को ज्ञापन दिया जाए। पूर्व प्रो. सोमबीर राठी ने कहा कि विश्वविद्यालय में सभी शिक्षित वर्ग से आते हैं, अपना भला-बुरा सोच सकते हैं। अगर सरकार उनके अधिकारों का हनन करती है तो विश्वविद्यालय से जुड़े हर व्यक्ति को आंदोलन करना चाहिए। दयानंद सोनी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. विकास सिवाच ने कहा कि सरकार इस तरह से तुगलकी फरमान जारी करेगी तो शिक्षक, गैर शिक्षक, छात्र चुप नहीं बैठेंगे। बैठक में राजेश गिरधर, वरुण कुमार सैनी, फूल कुमार बोहत, सुमेर अहलावत, डॉ. सुधीर कटारिया, एसएफआई से अर्जुन, एबीवीपी से सन्नी नारा, एनएसयूआई से हिमांशु, आईएसओ से अरविंद गोस्वामी, जीजेयू से इंद्राज भारती, पीजीआई के तारीफ नांदल, संजय सिंहमार, एचएयू से राजेश ठाकुर, खानपुर विश्वविद्यालय से डॉ. पवन भी मौजूद थे।
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