फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

व्यवस्था का पहिया जाम, छात्राएं बे‘बस’

विज्ञापन
बस स्टैंड में खड़ी पिंक बसें। संवाद
विज्ञापन
रोहतक। साहब, ये रोहतक डिपो है यहां प्रदेश सरकार की मंशा का कोई महत्व नहीं है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर ध्यान देना तो दूर स्वयं डिपो जीएम के आदेशों का यहां पालन नहीं होता। इसका स्पष्ट उदाहरण है कि यहां छात्राओं की सहूलियत के लिए सरकार की ओर से भेजी गई पांच पिंक सिटी बसें हैं और ये वर्कशॉप में ही खड़ी रहती हैं। इस कारण शहर की छात्राओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सिर्फ एक बस वर्कशॉप से निकलती है, जोकि रोडवेज की नकदी बैंक तक ले जाने के लिए निकाली जाती है।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार ने छात्राओं के लिए बसों में निशुल्क आवागमन की सुविधा दी है। निजी बसों को परमिट देने की शर्तों में भी यह शामिल है। दूरस्थ क्षेत्र से आने वाली छात्राओं के लिए प्रदेश सरकार ने पिंक मिनी बसें चलवाई हैं। इन बसों का संचालन शहर अथवा शहर से सटे क्षेत्रों के लिए किया जाना है। मगर हकीकत यह है कि पांचों पिंक मिनी बसें छात्राओं के लिए रोहतक डिपो नहीं चला रहा है। पांचों बसें वर्कशॉप की ही शोभा बढ़ा रही हैं। चौबीस घंटे में सिर्फ एक बस वर्कशॉप के गेट से निकलती है, वह भी सरकारी कार्य के लिए।
डिपो ने बनाए 32 हजार छात्राओं के बस पास
स्कूल-कॉलेज पूरी तरह से खुल गए हैं। पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं का आना भी शुरू हो गया है। इसके चलते डिपो ने 32 हजार छात्राओं को बस पास बनाकर जारी भी कर दिए हैं। कुछ स्कूल-कॉलेज बचे हैं, जिन्होंने बस पास के लिए छात्राओं की सूची नहीं भेजी है।
विज्ञापन

अधिकारियों का दावा : 85 बसों का करवा रहे संचालन
डिपो अधिकारियों का कहना है कि 85 बसों का देहातों से संचालन कराया जा रहा है, जिनसे छात्राएं आती हैं। छात्राओं की संख्या ज्यादा हैं और पिंक मिनी बसों की क्षमता कम। इसलिए देहात के लिए बसों का संचालन संभव नहीं है।
शहर में ही चलाई जानी है पिंक मिनी बसें
पिंक मिनी बसों का संचालन देहात में नहीं बल्कि शहर में किया जाना है ताकि स्कूल-कॉलेज से छात्राएं बिना किसी दिक्कत के सीधे बस स्टैंड तक आवागमन कर सकें। बस स्टैंड से छात्राएं गंतव्य के लिए रोडवेज बस में सवार होकर चली जाएं।
एंबुलेंस से बस बने गुजरे चार माह मगर नहीं चलीं
रोहतक डिपो को करीब दो साल पहले पांच पिंक मिनी बसें मिली थी। कुछ दिन बसें चलने के बाद लॉकडाउन हो गया। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में इन बसों को एंबुलेंस में तब्दील करके स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया। हालात सामान्य हुए तो स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें वापस कर दिया। मुख्यालय से आदेश आने के बाद एंबुलेंसों को फिर बस में तब्दील कर दिया गया। करीब चार माह गुजर गए मगर अभी तक इन बसों का सुचारु संचालन नहीं हो सका है।
रोहतक डिपो महाप्रबंधक दलबीर फौगाट से दो टूक
सवाल : छात्राओं की पिंक मिनी बसें नहीं चल रही हैं।
जवाब : गांवों में 85 बड़ी बसें भेजते हैं। छोटी बसें तो एक ही गांव में भर जाती है। लड़ाई हो जाती है।
सवाल : आप पांच बार कह चुके हैं कि पिंक मिनी बसों को चलवाने के ट्रैफिक मैनेजर को आदेश कर दिए हैं। सिर्फ एक बस चल रही है, वह भी विभाग की नकदी लेकर जाती है।
विज्ञापन

जवाब : यह तो बड़ा गड़बड़ मामला है। देखते हैं, अब कॉलेज की डिमांड आएगी तो आसपास सेट कर देंगे।
सवाल : लगता है कि ट्रैफिक मैनेजर आपके आदेशों को नहीं मानते हैं।
जवाब : मैं अभी डीआई (ड्यूटी इंस्पेक्टर) से कहता हूं कि इन बसों का राउंड लगवाएं। दो दिन में इन बसों को चलवाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें