रोहतक। झज्जर रोड स्थित वैश्य संस्था की दुकान को किरायेदार खाली करे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर सिविल जज जूनियर डिवीजन अमरदीप सिंह की अदालत ने यह निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि शीर्ष अदालत के फैसले के तहत किरायेदार को यह अधिकार नहीं होता है कि वह तय करे कि मालिक अपनी प्रॉपर्टी का कैसे और क्या उपयोग करे।
ऐसे में संस्था की तरफ से दायर दुकान खाली करवाने की याचिका मंजूर की जाती है। अगर संस्था खाली कराई जगह में छात्रों के लिए कमरे या दूसरे जनहित के कार्य न करवाकर फिर से किसी अन्य को किराये पर देती है तो किरायेदार को हक है कि वह दोबारा दुकान को किराये पर ले।
वैश्य संस्था के तत्कालीन महासचिव चंद्र गर्ग ने साल 2018 में याचिका दायर की थी कि झज्जर रोड स्थित वैश्य गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल का संचालन वैश्य संस्था की सोसाइटी तय करती है। स्कूल के साथ में चार दुकानें हैं। इनमें से एक दुकान के किरायेदार रामकुमार गुप्ता हैं। उन्होंने 1984 में दो हजार रुपये मासिक व 2200 रुपये गृहकर व बिजली शुल्क देना तय किया था।
किरायेदार ने समय पर किराया नहीं दिया। 11 हजार रुपये किराया बकाया है। दूसरे पक्ष ने समय रहते निगम को किराया जमा करवा दिया था। बताया कि वैश्य गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा हो गई है। ऐसे में दुकान तोड़कर कमरा बनाया जाएगा। दूसरे पक्ष ने कहा कि वह बकाया किराया जमा करवा देते हैं।
वहीं, डीईओ कार्यालय से संस्था की ओर से बताए विद्यार्थियों के आंकड़े में अंतर है। इस पर संस्था की तरफ से वकील ने कहा कि शिक्षा विभाग अपने पोर्टल पर जहां तक संभव हो पूरे कागजात होने पर विद्यार्थियों के नाम जारी करता है जबकि संस्था के पास दाखिला लेने वाले सभी
विद्यार्थियों के नाम आते हैं। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने वैश्य संस्था के पक्ष में निर्णय सुनाया है।