अमरुत योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पेयजल सप्लाई नहीं होने अथवा तमाम जगह दूषित पानी की आपूर्ति को उच्च अधिकारियों ने काफी गंभीरता से लिया है। 23 मई को अमर उजाला में प्रकाशित समाचार पर अमरुत योजना की कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारी बुधवार को हकीकत जानने के लिए पहुंचे। ठेकेदार के समय पर काम पूरा नहीं करने व गुणवत्ता को लेकर नोटिस देने की तैयारी है।
अमर उजाला के 23 मई के अंक में प्रकाशित किया कि अभी तक 15 करोड़ रुपये की लागत से बना तीसरा जलघर चालू नहीं हो सका है, क्योंकि इसकी आउटलेट पाइप तक नहीं डाली गई हैं। बोहर के बूस्टर का केबल ढांचा बना है। मस्तनाथ नगर पंपिंग स्टेशन भी पूरा तैयार नहीं है। पालिका कॉलोनी में बूस्टर तो बनकर तैयार हो गया है, मगर अभी तक चालू नहीं किया गया है। जनहित के काम को लेकर न सिर्फ ठेकेदार बल्कि जिम्मेदार अधिकारी भी लापरवाह बने हुए हैं। यही वजह है कि अधिकारी 15 दिन में जलघर-तीन चालू होने का दावा करते हैं और ठेकेदार निर्माण पूरा होने में चार-पांच माह का समय बताते हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद उच्च अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। पंचकूला में तैनात निकाय विभाग के अफसरों ने निगम आयुक्त को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, रोहतक जिले में अमरुत प्रोजेक्ट की कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारी अभिषेक को हकीकत देखने के लिए भेज दिया।
बुधवार को अधिशासी अभियंता हेड क्वार्टर मनजीत दहिया के साथ अभिषेक ने निगम आयुक्त डॉ. नरहरि बांगड़ से मुलाकात की। जिसमें तय हुआ कि वह न सिर्फ निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेंगे, बल्कि गुणवत्ता अथवा समयावधि में काम पूरा नहीं करने पर समुचित कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे। वहीं, निगम अधिकारी भी अपनी तरफ से नोटिस देकर कार्रवाई करने के मूड में हैं।
अधिशासी अभियंता हेड क्वार्टर मनजीत दहिया ने बताया कि अमरुत प्रोजेक्ट की कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारी पेयजल से संबंधित अभी तक हुए काम का जायजा लेने के लिए आ गए हैं। वह निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट देंगे तब आगे की कार्रवाई की जाएगी।