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22 साल बाद मश्कोह योद्धाओं से गर्म जोशी के साथ मिले कारगिल विजय के असली हीरो

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मिलन समारोह में एक-दूसरे से गले मिलते 17 जाट रेजिमेंट के पूर्व सैनिक। सतीश कुमार
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महाशय। क्या हाल है तेरा। सेहत बना ली। अरे माडू कैसा है। मोटा हो गया रै.. मश्कोह योद्धाओं की टीम करीब 22 साल बाद कुछ इसी अंदाज में मिली। शहर के सेक्टर चार स्थित जिमखाना क्लब में कारगिल विजय के असली हीरो वीर चक्र और सेना मेडल से सम्मानित ब्रिगेडियर उमेश सिंह बावा भी गर्म जोशी के साथ टीम से मिले। कारगिल विजय दिवस पर 17 जाट रेजिमेंट के पूर्व सैनिकों की ओर से आयोजित मश्कोह योद्धा मिलन समारोह में जवानों ने एक-दूसरे के गले लगकर खुशी जताई व अपनी यादें ताजा की।
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कलमबद्ध किए मश्कोह के अनुभव
वीर चक्र व सेना मेडल विजेता बिग्रेडियर उमेश सिंह बावा ने कहा कि कारगिल युद्ध के 22 वर्ष बाद अपनी टीम के जांबाजों से मिल रहा हूं। 17 जाट रेजिमेंट की यह टीम युद्ध के समय मेरे साथ थी। भविष्य में कोई मुझे लड़ाई देखने को कहे तो मैं ना कहूंगा। युद्ध केवल बर्बादी लाता है। युद्ध के अपने अनुभव पर लॉकडाउन में किताब लिखी है। इसमें युद्ध का मंजर दर्शाया है। इस युद्ध पर बनी फिल्म में मेरा किरदार अभिनेता किरण कुमार ने निभाया था।
जवानों पर फिल्म ने किया प्रोत्साहित
कर्नल दीपक रामपाल ने बताया कि 1999 में पाक से लड़े युद्ध में वीर चक्र मिला। मश्कोह में बतौर मेजर अपनी टीम के साथ लड़ाई लड़ी। बगैर रोटी पानी सिर्फ बर्फ के भरोसे पहाड़ों पर संघर्ष किया। युद्ध से किसी का भला नहीं हुआ है। इससे बचने के लिए हमारा सतर्क रहना जरूरी है। इस युद्ध पर बनी फिल्म में मेरा किरदार अभिनेता संजय कपूर ने निभाया है। यह मेरे लिए गौरवपूर्ण है।
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मश्कोह में मुश्किल थे युद्ध के हालात
कर्नल डॉ. विशाल वीर शर्मा ने कहा कि मश्कोह में युद्ध के हालात बेहद मुश्किल थे। मेरी नई नियुक्ति हुई थी। पहली बार युद्ध में घायल जवानों का उपचार करने के लिए पहाड़ चढ़ना, गोलीबारी के बीच मौके पर ही उनका इलाज करना अपने आप में भयावह था। अंधेरे में जवानों के घावों को सीना सबसे मुश्किल रहा।
कैप्टन ने एक दिन में तीन मोर्चों पर दिलाई जीत
सूबेदार सोमवीर ने कहा कि रेजिमेंट की ओर से इस समारोह में विशेष तौर पर शामिल हुआ हूं। यह मेरे लिए गौरवान्वित करने वाला समय है। मुझे एक साथ 45 मश्कोह योद्धाओं से मुलाकात का अवसर मिला है। मश्कोह में पाक से हुए युद्ध में रेजिमेंट के कैप्टन अनुज नैय्यर का शौर्य काबिल-ए-तारीफ रहा। एक ही दिन में उन्होंने तीन मोर्चों पर जीत दिलाई। युद्ध पर जाने से पहले ही उनकी शादी तय हुई थी। इसलिए अपनी शादी की अंगूठी और मंगेतर के फोटो समेत पर्स ब्रिगेडियर उमेश सिंह बावा को सौंपा था। उन्हें कहा कि युद्ध में मुझे कुछ हो जाए तो ये पाकिस्तानियों के हाथ नहीं लगने चाहिए। इसलिए इन्हें अपने देश में सुरक्षित छोड़ कर जा रहा हूं। उनकी यह बात भावुक कर जाती है।
कारगिल शहीदों को किया नमन
विजय दिवस की 22वीं वर्षगांठ पर एमडीयू व जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र हरियाणा चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां भारतीय सेना के वीर जवानों के अदम्य साहस, त्याग व बलिदान को याद किया गया।
विवि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, मुख्य अतिथि कर्नल योगेंदर सिंह, कर्नल जयबंस सिंह, अध्ययन केंद्र के सचिव डॉ. विवेक बाल्यान, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के संरक्षक प्रो. टंकेश्वर कुमार व डीन प्रो. राजकुमार ने भी अपने विचार रखे।
राष्ट्र को अपने शहीदों पर नाज : कर्नल आरएस मलिक
कारगिल विजय दिवस पर मानसरोवर पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पूर्व सैनिकों व नागरिकों ने शहीदी दिवस मनाया। हरियाणा पूर्व सैनिक संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शाम को कैंडल मार्च निकाला गया। शहीदों को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संघ के पूर्व प्रधान कर्नल आरएस मालिक ने कहा कि 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर हरियाणा पूर्व सैनिक भवन रोहतक में होने वाले सम्मान समारोह में कारगिल के युद्ध के शहीदों की वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा।
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