पीजीआई की नेत्र ओपीडी लगी मरीजों की भीड़। संवाद
रोहतक। मौसम साफ होते ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। पीजीआई में हर दिन लगभग 800 मरीज आंखों का इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें मोतियाबिंद के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल है। 40 वर्ष की उम्र पार होते ही मोतियाबिंद का खतरा दोगुना हो जाता है। समय से आंखों की जांच नहीं करवाने से काला मोतियाबिंद हो सकता है। इससे आंखों की स्थाई दृष्टि जा सकती है, इसलिए मोतियाबिंद के लक्षण दिखाई देने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इससे मोतियाबिंद को फैलने से रोका जा सकता है। 9 से 15 मार्च तक ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान लोगों को ग्लूकोमा के प्रति जागरूक किया गया है। सर्दी के जाने और गर्मी शुरू होने के बीच का समय मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए अनुकूल रहता है, इस बीच ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसा ही गर्मी जाने और सर्दी के आगमन पर होता है। पीजीआई में हर रोज लगभग 45 मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे है।
बच्चों को मोतियाबिंद होने पर निशुल्क लैंस लगाए जा रहे
सफेद मोतियाबिंद छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। आंखों की जांच करवाने आ रहे छोटे बच्चों में जन्म से ही मोतियाबिंद केस मिल रहे हैं। ऐसे बच्चों को पीजीआई में निशुल्क लैंस दिए जा रहे है
यह हैं मोतियाबिंद के लक्षण
मरीजों को आंखों में दर्द होने, रोशनी कम महसूस होने, पढ़ते समय धुंधलापन दिखाई देने, आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ने, आंखों में लगी पुरानी चाेट के कारण, उच्च रक्तचाप व मधुमेह के कारण मोतियाबिंद होने का खतरा रहता है। यह लक्षण दिखाई देने पर आंखों की जांच करवानी चाहिए।
मौसम साफ होने के कारण मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने वालों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। 40 की उम्र पार कर चुके लोगों में मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए समय-समय पर आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए।
डॉ. आर.एस चौहान, नेत्र विभाग अध्यक्ष, पीजीआईएमएस