रोहतक। पीजीआई में 10 साल के बच्चे को रेबीज की तीसरी वैक्सीन नहीं लगाने को लेकर मामले पर राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केस दर्ज कर लिया है। बच्चे के अभिभावकों ने कार्रवाई की मांग की है।
इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग ने मामले को संज्ञान में लेकर उपायुक्त सचिन गुप्ता से सात दिन में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी। उपायुक्त ने पीजीआई से मामले को लेकर जवाब-तलब किया था। इस पर पीजीआई ने एक कमेटी का गठन किया लेकिन उसकी रिपोर्ट को लेकर संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. वरुण अरोड़ा ने कुछ पता नहीं होने का दावा दिया है।
बच्चे की माता रेणु फोगाट की शिकायत है कि उनके 10 वर्षीय बेटे का गिलहरी के काटने पर पीजीआई में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही 12 फरवरी को रेबीज की तीसरी वैक्सीन लगनी थी लेकिन वह निर्धारित दिन नहीं लग पाई।
इसके बाद पीजीआई के आपातकालीन विभाग में 13 फरवरी को वैक्सीन लगवाने पहुंचे तो कहा गया कि अगले दिन ओपीडी में आना। मना करने के बाद सीएमओ की मोहर भी लगवा ली थी। मोहर के बाद भी डॉ. अल्का यादव की टीम ने उन्हें वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया।
बार-बार प्रार्थना के बाद भी वैक्सीन नहीं लगाई गई। इसके लिए डॉ. अल्का यादव से संपर्क किया तो उन्हाेंने ड्यूटी न होने का हवाला देकर मना कर दिया जबकि ड्यूटी रोस्टर में दर्ज थी।
सीपी ग्राम पोर्टल पर शिकायत के जवाब में डॉ. अल्का यादव ने बच्चे पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। बच्चे की मां का कहना है कि उन्होंने पीजीआई की तरफ से सभी आरोपों के खंडन को बिंदुवार गलत साबित भी किया है। इसको लेकर डॉ. अल्का यादव से भी संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।
वर्जन :
उपायुक्त सचिन गुप्ता की तरफ से जवाब मांगने पर संस्थान ने कमेटी गठित की थी। कमेटी की बैठक भी हो चुकी है लेकिन रिपोर्ट को लेकर कुछ पता नहीं है। पता करके आपको अपडेट देता हूं। -डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई।