एक तरफ लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है, दूसरी तरफ खाप पंचायतों ने इसका विरोध करने का निर्णय लिया है। महिला संगठन समर्थन में हैं, लेकिन वे सुरक्षा व रोजगार की गारंटी चाहती हैं। वहीं, आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले चार साल में जिले में 38 नाबालिगों की शादी की कोशिश की गई थी।
शादी की उम्र 21 करना तो ठीक है, लेकिन अकेले कानून बनाने से कुछ नहीं होगा। सरकार को महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल से लेकर रोजगार की गारंटी भी देनी होगी। बेटियों को पढ़ने के बाद रोजगार भी चाहिए। - डॉक्टर जगमति सांगवान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति
सरकार ग्रामीण क्षेत्र में माहौल व हालात को भी देखे, जहां 10वीं व 12वीं करने के बाद गरीब माता-पिता बेटी की शादी करने की सोचता है। क्योंकि वह बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है। शिक्षा के आधार पर सरकार बेटियों की शादी की उम्र 18 से 21 साल करने का निर्णय तो लेने जा रही है, लेकिन हर पहलू पर विचार किया जाना चाहिए।- ओमप्रकाश नांदल, प्रधान नांदल खाप
ग्रामीण एरिया में माहौल देखते हुए लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 करना उचित नहीं है। क्योंकि समाज में हर तबके के लोग हैं। ग्रामीण एरिया के हिसाब से 18 साल की उम्र उचित है। जींद में हो रही खापों की महापंचायत में प्रस्ताव पास करके सरकार को भेजा जाएगा। - संजय देशवाल, कार्यकारी प्रधान देशवाल खाप
ग्रामीण एरिया में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने का निर्णय एकदम गलत है। क्योंकि गरीब परिवार 10वीं व 12वीं के बाद बेटियों को पढ़ा नहीं पाते। ऐसे हालात में वे बेटियों की सुरक्षा करेंगे या परिवार का पालन पोषण करने मजदूरी करने जाएंगे। सरकार को इस तरफ भी ध्यान देना चाहिए।- ओमप्रकाश हुड्डा, प्रधान हुड्डा खाप
लड़कियों की शादी की उम्र 18 से 21 करने का सरकार का निर्णय उचित है। क्योंकि कम उम्र में लड़कियां जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नहीं हो पाती। परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए वे मानसिक तौर पर तैयार नहीं हो पाती। हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव से आईपीसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कानून की नजर में वयस्क होने की उम्र पहले की तरह 18 साल ही रहेगी। - जितेंद्र हुड्डा, सीनियर अधिवक्ता जिला बार
समय-समय पर नाबालिग लड़कियों की शादी करने की शिकायत आती रहती है। चार साल में 38 नाबालिग लड़कियों की शादी रुकवाई गई। जबकि 14 केस ऐसे थे, जब लड़की या लड़का बालिग मिला। कई केस ऐसे सामने आए हैं, जब बेटियां परिवार के दबाव में विरोध नहीं कर पाती। हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव से लड़कियों को आत्मनिर्भर होने का मौका मिलेगा और यह बदलाव समय की जरूरत है। - करमिंदर कौर, जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी
साल शिकायत मिली शादी रुकवाई गलत सूचना