संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। हर वर्ष होली के बाद गर्मी बढ़ने से त्वचा संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इनमें प्रीकली हीट, सनबर्न, फंगल इंफेक्शन व घमोरियां जैसी समस्याएं शामिल हैं। युवाओं व 30 साल तक की महिलाओं में पिंपल बढ़ने का खतरा रहता है।
नागरिक अस्पताल में कार्यरत त्चचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि हर वर्ष गर्मी आने पर त्वचा रोग की ओपीडी लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। सामान्य तौर पर अस्पताल में 250 मरीज पहुंचते हैं। फिलहाल ओपीडी सामान्य है।
इस मौसम में कीट-पतगों से काटने वाली एलर्जी भी हो जाती है। गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने से ह्यूमिडिटी भी बढ़ जाती है। यह समस्याएं पराबैंगनी किरणों की अधिकता के कारण भी बढ़ जाती है। इसलिए गर्मी की शुरुआत में ही इन समस्याओं के प्रति जागरूक होना जरूरी हो जाता है।
प्रीकली हीट में पसीने वाली ग्रथियां ब्लॉक हो जाती हैं। ये गर्मी व पसीने से होता है। इनकी वजह से बारीक लाल दाने बन जाते हैं जिनमें खुजली भी होती है। ये कमर व अन्य स्थानों पर हो जाते हैं। इसको आम भाषा में घमोरियां भी कहा जाता है। गीलेपन व ह्यूमिडिटी की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। इसको आम भाषा में खारवे कहा जाता है।
दाने होने पर खुजली की समस्या रहती है जो गर्दन, जांघ व अन्य स्थानों पर होती है। इसका मुख्य कारण चिकनी त्वचा के कारण रंध्रों का बंद होना है। ये कमर उपर होती है जिनमें खुजली कम व दाने ज्यादा होते हैं।
ये सावधानियां जरूर बरतें
15 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाकर घर से निकलें। गर्मी के मौसम में हल्के रंग के कपड़े पहनें। सूती कपड़े पहनें ताकि हवा गुजर सके। अधिक पानी पीएं ताकि शरीर हाइड्रेट रहे। ऐसे तरल पेय पदार्थों का उपयोग करें जो आर्टिफिशियल तरीके से न बनी हो। इनमें शिकंजी, पानी व लस्सी जैसे तरल पदार्थ शामिल हैं। शारीरिक स्वच्छता का भी ध्यान रखें। अधिक समस्या होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।