दीपावली पर मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री की शुद्धता की परख खुद करनी होगी। यह हम नहीं, सरकारी व्यवस्था कह रही है। त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने वाले अधिकारी खुद ओवरलोड हैं। हालात ये हैं कि एक-एक अधिकारी पर दो से चार जिलों का कार्यभार है। सैंपलिंग करना, कोर्ट जाना, कागजी कार्रवाई निपटना, लाइसेंस व पंजीकरण की जिम्मेदारी इन्हीं के जिम्मे है। ऐसे में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट (एफएसएसए) के तहत हर माह निर्धारित 30 सैंपल तक लेना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
दीपों के पर्व दिवाली के स्वागत की तैयारियां रफ्तार पकड़ चुकी है। व्रत व त्योहारों के इस सीजन में प्रतिष्ठानों, कार्यालयों व मिठाई की दुकानों पर सजावट का काम शुरू हो गया है। दुकानदार मिठाइयों का निर्माण कर उन्हें कोल्ड स्टोर में सुरक्षित कर रहे हैं। दिवाली पर दूध की किल्लत के चलते अभी मावा (खोवा) तैयार किया जा रहा है। यह भी बड़ी मात्रा में कोल्ड स्टोरों में सुरक्षित किया जा रहा है। इससे स्टोर किए जा रहे मावे व मिठाईयां करीब 15 दिन बाद बाजार में बिक्री के लिए उतरेंगी। ऐसे में ये कितनी खाने लायक होंगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
इधर, त्योहार पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने वाले खुद ओवरलोड नजर आ रहे हैं। प्रदेश के 22 जिलों में कहने को एफएसएसए के तहत एफडीए विभाग बना दिया गया है। इसमें सैंपलिंग, लाइसेंस, पंजीकरण व अन्य कार्यों के लिए डीओ (डेजेग्नेटेड ऑफिसर) बना दिए गए हैं। प्रदेश के 22 जिलों के लिए फिलहाल छह डीओ तैनात हैं। इनमें से किसी के पास एक से दो तो किसी के पास तीन से चार जिले हैं। यही नहीं, एफएसओ एवं रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के भी प्रदेश भर में 13 ही अधिकारी हैं। इनके पास भी कहीं एक से दो तो कहीं तीन जिलों का कार्यभार है। ऐसे में ये या तो ज्यादातर कोर्ट या कागजी कार्रवाई पूरी करने में ही व्यस्त रहते हैं। जबकि त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए ताबड़तोड़ सैंपल लेने की जरूरत है।
दिवाली के बाद आएगी सैंपल की रिपोर्ट
एफडीए विभाग के अधिकारी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखने व मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए अब सैंपलिंग अभियान शुरू करेंगे। इस समय लिए गए सैंपल जांच के लिए मुख्यालय की लैब में भेजे जाएंगे। यहां से रिपोर्ट आने में करीब एक महीने का समय लगेगा। तब तक न बाजारों में सजी स्टालें रहेंगी, न खाद्य सामग्री। दिवाली पर खरीदी गई मिठाई लोग खाकर खत्म भी कर चुके होंगे। इसके बाद ही रिपोर्ट आएगी। ऐसे में स्वास्थ्य की गारंटी आपके अपने हाथ में है।
खाद्य सामग्री की जांच की जा रही है। इस काम में तेजी लाई जाएगी। विभाग के पास पर्याप्त अधिकारी व स्टाफ मौजूद है। लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
- डीके शर्मा, ज्वाइंट कमिश्नर फूड
प्रदेश के जिलों में डीओ व एफएसओ या रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी का ब्योरा
जिला डीओ नाम एफएसओ नाम
अंबाला महाबीर सिंह डॉ. राजीव कुमार
भिवानी राजेंद्र कुमार डॉ. हर्ष कुमारी
चरखी दादरी राजेंद्र कुमार डॉ. दीपक चौधरी
फरीदाबाद पृथ्वी सिंह डॉ. सचिन शर्मा
फतेहाबाद एनडी शर्मा सुरेंद्र पूनिया
गुरुग्राम राजेंद्र कुमार श्यामलाल महिवाल
हिसार एनडी शर्मा भंवर सिंह
झज्जर राजेंद्र कुमार डॉ. जोंगेंद्र सिंह
जींद ओम कुमार डॉ. अरविंदर जीत सिंह
कैथल सुभाष चंद्र डॉ. अरविंदर जीत सिंह
करनाल सुभाष चंद्र डॉ. संदीप कुमार
कुरुक्षेत्र सुभाष चंद्र डॉ. संदीप कुमार
महेंद्रगढ़ पृथ्वी सिंह डॉ. दीपक चौधरी
मेवात पृथ्वी सिंह डॉ. दीपक चौधरी
पलवल पृथ्वी सिंह डॉ. सचिन शर्मा
पंचकूला महाबीर सिंह डॉ. गौरव शर्मा
पानीपत ओम कुमार डॉ. संदीप चौधरी
रेवाड़ी पृथ्वी सिंह डॉ. दीपक चौधरी
रोहतक ओम कुमार डॉ. हर्ष कुमारी
सिरसा एनडी शर्मा सुरेंद्र पूनिया
सोनीपत ओम कुमार वीरेंद्र कुमार
यमुनानगर महाबीर सिंह डॉ. प्रेम सिंह