रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में रंग महोत्सव के रंग व्यंजन में व्यंजनों की विविधता और स्वादिष्ट स्वाद ने अतिथियों को खूब लुभाया। अलग-अलग कॉलेजों के विद्यार्थियों ने खाने के स्टॉल लगाए थे। इसमें ज्यादातर हरियाणा का देसी खाने के स्टॉल लगाए। इसमें पूड़े, चूरमा, खीर, हेल्दी फूड मिलेट चूरमा, लस्सी, फ्लेवर्ड मिल्क, पकौड़े, ब्रेड पकौड़ा, आलू-पूरी, कढ़ी-चावल, रायता, नींबू पानी, छोले-भटूरे समेत ओडिशा के पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। खान-पान के इस जश्न में गीत-संगीत का तड़का बीन पार्टी और ढोल पार्टी ने डाला।
हम पिछले दो साल से भाग ले रहे हैं। हमारे ठाठ-बाट ढाबा पर सारा हरियाणवी खाना बनाया है, जिसमें हेल्थ भी और टेस्ट भी है। हमने चूरमा, गुलगुले, रबड़ी, बाजरे की रोटी, मक्के की रोटी, सरसों का साग, कढ़ी-चावल, खीर व हलवा बनाए हैं। खाने को बनाने में देसी घी का प्रयोग किया गया। हमारे खाने को जिम में जाने वाले भी खा सकते हैं। एक थाली का मूल्य 100 रुपये है। हमारी टीम में आठ सदस्य हैं। सारा मैनेजमेंट लेफ्टिनेंट प्रियंका ने किया है। हमारी टीम में नेहा, अंशु, साक्षी, समीक्षा, गीतांजलि व अनुसा शामिल हैं।
अपूर्वा छात्रा, जीवीएम गर्ल्स काॅलेज सोनीपत।
हमारी टीम में आठ सदस्य हैं। एक थाली का मूल्य 120 रुपये हैं, जिसमें चावल, बाजरे की खिचड़ी, आम की लोंजी, कढ़ी-पकोड़ा, बेसन की रोटी, छाछ शामिल हैं। बाजरे की टिकड़ी बनाई है। रबड़ी भी लोगों को काफी पसंद आई। हम पिछले तीन साल से भाग ले रहे हैं। वर्ष 2022 में पुरस्कार जीता था।
डॉ. प्रगति, केएल मेहता दयानंद कॉलेज, फरीदाबाद
हमारी टीम में 6 सदस्य हैं, सभी ओडिशा के हैं। हम पहली बार भाग ले रहे हैं। हमने ओडिशा का प्रसिद्ध दही पखाल बनाया है। चावल के साथ पानी व दही को मिलाकर और नमक मसाले डालकर छोक लगाकर बनाया जाता है। यह गर्मी में सबसे ज्यादा पीया जाता है, क्योंकि इसको पीने से गर्मी महसूस नहीं है। इसके अलावा रसाबड़ी व रसमलाई से अलग हैं। कोफ्ता व परमल भी बनाया है।
अयान, सियास्ते कॉलेज झज्जर
29सीटीके39-अपूर्वा। संवाद- फोटो : संवाद
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