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Rohtak News: विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता जताई

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रोहतक। ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी (बीएसएस) ने इंडिया मार्च फॉर साइंस ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के बैनर तले रविवार को एमडीयू के गेट नंबर एक से दिल्ली बाईपास तक साइंस मार्च किया, इसमें विज्ञान कार्यकर्ता व छात्र शामिल हुए। विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
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ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी के अखिल भारतीय कार्यकारी कमेटी के सदस्य चंचल घोष ने कहा कि जंगलों को खाली कराने के लिए उनमें आग लगाई जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के लिए जंगलों की जमीन को कॉरपोरेट के हवाले किया जा रहा है। इससे जलवायु संतुलन बिगड़ रहा है। समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। जहां कभी बाढ़ नहीं आई, वहां अब तबाही मचाने वाली बाढ़ आ रही है। बादल फटने की घटना खूब हो रही हैं। पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। यह पूरी मानव जाति के लिए खतरे की घंटी है। इसलिए इस ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए कारगर सरकारी नीतियों की जरूरत है। उन्होंने वनों की कटाई, ''इको-टूरिज्म'' और खनन के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के गलत उपयोग और कारखानों व परिवहन से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग की।
पूर्व प्राचार्य बसंत ने कहा कि हमारी सरकार गैरवैज्ञानिक विचारों को प्रसारित कर रही है। पाठ्यक्रम में विज्ञान विरोधी चिंतन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विज्ञान विरोधी पहलुओं व इतिहास के नाम पर मिथकों के प्रचार-प्रसार का विरोध किया। संविधान के आर्टिकल 51 ए को जोरदार ढंग से लागू करने की मांग की।
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गणित शिक्षक हरीश कुमार सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार एक तरफ रिसर्च में प्रयोग होने वाले उत्पादों पर भारी टैक्स लगा रही है। आईआईटी जैसे संस्थानों से ब्याज समेत जीएसटी वसूल रही है। दूसरी तरफ शिक्षा पर बजट लगातार घटा रही है। उन्होंने शिक्षा बजट (केंद्र और राज्य दोनों) में वृद्धि और अनुसंधान कार्यों के लिए धन में पर्याप्त बढ़ोतरी की भी मांग की।
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