कोरोना काल में विद्यार्थियों की पढ़ाई संबंधी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाजार में भी विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल रही हैं। पहली से पांचवीं कक्षा की एससीईआरटी की किताबें दुकानों पर खत्म हो चुकी हैं। छठी से आठवीं कक्षा की एनसीईआरटी की किताबें भी कुछ ही दुकानों पर मुश्किल से मिल पा रही हैं। इनके भी दाम 550 से 700 रुपये है। ऐसे में बगैर पुस्तक घर पर रहकर पढ़ाई करना विद्यार्थियों के लिए परेशानी बन गया है।
सरकार व शिक्षा विभाग ग्रीष्मावकाश के बाद जुलाई से स्कूल खोलने की तैयारी में है। महामारी काल में स्कूल खुलेंगे तो पहली से आठवीं कक्षा के ज्यादातर विद्यार्थी बगैर पुस्तक कक्षाओं में पहुंचेंगे। इस परिस्थिति में पठन-पाठन को बेहतर व सुचारु ढंग से चलना अपने आप में सवाल खड़े करेगा। इसकी बड़ी वजह विद्यार्थियों के पास किताबें नहीं होना है। सरकार इस वर्ष कोरोना के कारण बच्चों को किताबें मुहैया नहीं करा पाई। किताबों के लिए दी जाने वाली राशि भी अभी तक जारी नहीं हुई है। यही नहीं, रुपये का इंतजाम होने पर भी विद्यार्थियों के हाथ में किताब पहुंच जाए, यह कहना मुश्किल है। बाजार में एनसीईआरटी व एससीईआरटी की किताबों की अनुपलब्धता अध्ययन की राह में रोड़ा साबित हो सकती है। इससे विद्यार्थी व उनके अभिभावक ही नहीं, शिक्षक भी परेशान हैं।
300 रुपये में कैसे आएंगी 10 पुस्तकें
बाजार में एनसीईआरटी की किताबों की अनुपलब्धता के साथ विद्यार्थियों को उनकी कीमतों ने भी परेशान किया है। सरकार ने पहली बार किताबों के बजाय विद्यार्थियों को राशि देने की योजना बनाई है। इसके तहत पहली से पांचवीं कक्षा के लिए 200 रुपये व छठी से आठवीं के लिए 300 रुपये दिए जाने हैं। जबकि बाजार में किताबों की कीमत 250 से 700 रुपये है। ऐसे में सरकार से मिलने वाली राशि किताबें खरीदने के लिए कम पड़ेगी। इन पर दुकानदार छूट भी नहीं दे रहे हैं।
पहली से पांचवीं की पुस्तकें खत्म
शहर के रेलवे रोड स्थित पुस्तक विक्रेता ने बताया कि अप्रैल-मई में किताबों की मांग रहती है। अब जून का अंतिम सप्ताह चल रहा है। इस समय एनसीईआरटी की किताबें कम ही बची हैं। कक्षा छह से आठवीं के कुछ सेट हैं। पहली से पांचवीं के एसईआरटी की किताबें नहीं हैं। अब सरकार ही आठवीं कक्षा तक किताबें देती रही हैं। इसलिए विक्रेता इन्हें कम ही रखता है।
कक्षा छठी से आठवीं की किताबें कम
शहर के मेडिकल मोड़ स्थित पुस्तक विक्रेता ने बताया कि एनसीईआरटी की कुछ ही किताबें बची हैं। इनकी मांग अप्रैल में ज्यादा थी। उस समय विद्यार्थी खरीद कर ले गए। अब नया स्टॉक नए सत्र में आएगा। पहली से पांचवीं तक की किताबें करीब 250 रुपये व छठी से आठवीं कक्षा की किताबें 550 से 700 रुपये तक मिल जाती हैं।
स्कूलों में बच्चों को ऑनलाइन अध्ययन कराया जा रहा है। विद्यार्थियों को अध्ययन में सुविधा के लिए पुरानी पुस्तकें मुहैया कराई जा रही हैं। स्कूल प्राचार्य खुद इस प्रसार में जुटे हुए हैं। सरकार से राशि मिलने पर विद्यार्थी बाजार से पुस्तकें खरीद सकते हैं।
- सुनीता पंवार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी