देश का भविष्य भावी पीढ़ी जन्म के साथ ही सरकारी व्यवस्था से जूझने लगी है। प्रदेश के नौनिहालों को पिछले करीब तीन महीने से निमोनिया से बचाव की वैक्सीन पीसीवी (नियमोकोकस कोंज्युकेट वैक्सीन) का इंतजार है। इस वैक्सीन के नहीं होने के चलते टीकाकरण और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों ही नहीं, पीजीआईएमएस तक में यह वैक्सीन नहीं है। आम आदमी को वैक्सीन बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही है। बाजार में भी यह वैक्सीन हर जगह उपलब्ध भी नहीं है। यह बड़ी मुश्किल से कुछ जगह ही मिल रही है। वैक्सीन कब आएगी, इस बारे में खुद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी नहीं जानते। अधिकारियों का दावा है कि वैक्सीन जल्द आने वाली है। यह विदेश से आनी है। इसके बाद सप्लाई दी जाएगी।
पीजीआई में रोज आ रहे 15 से ज्यादा केस
देश की भावी पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार ने टीकाकरण अनिवार्य किया है। इसके तहत सरकारी चिकित्सा केंद्रों पर बाकायदा कार्ड बनाकर शिशु का टीकाकरण शुरू किया जाता है। इस कार्ड के हिसाब से बच्चे को अलग-अलग समय पर टीका लगाया जाता है। इसमें पीसीवी भी शामिल है। पीजीआई में रोजाना औसतन 15 केस ऐसे आते हैं। इनमें से मुश्किल से चार शिशुओं को ही परिवार अपनी जेब से टीका लगवा पाते हैं। शेष को वैक्सीन की कमी के चलते बैरंग लौटना पड़ता है। यही हाल सिविल अस्पताल और अन्य प्रदेश के अन्य चिकित्सा संस्थानों का है।
क्या है पीसीवी
पीसीवी एक वैक्सीन है। इसे नियमोकोकस कोंज्युकेट वैक्सीन कहा जाता है। वर्ष 2018 से यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में बच्चों को दिया जाने लगा। यह नवजात शिशुओं को डेढ़ महीने, साढ़े तीन महीने और नौ महीने पर बूस्टर डोज दिया जाता है। यह वैक्सीन बच्चे के शरीर में जाने के चार सप्ताह बाद निमोनिया से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है।
निमोनी बैक्टीरिया करता है निमोनिया
बच्चों में अक्सर निमोनिया की शिकायत रहती है। सर्दी में यह शिकायत अधिक रहती है। शिशु के ज्यादा देर तक गीला रहने या संक्रमण के चलते निमोनिया बनता है। स्पैक्टोकोकस निमोनी बैक्टीरिया इसका कारण बनता है। इस बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए ही वैक्सीन दी जाती है। वैक्सीन नहीं मिलने से बच्चे में निमोनिया की आशंका बढ़ जाती है।
निजी अस्पताल चार हजार रुपये में दे रहे वैक्सीन
पीसीवी लगवाकर अपने बच्चे को निमोनिया से सुरक्षित रखना अभिभावकों को महंगा पड़ रहा है। निजी अस्पताल इस वैक्सीन के चार हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जबकि सरकारी संस्थानों में यह वैक्सीन नि:शुल्क दिया जाता है। आम आदमी यह महंगे वैक्सीन नहीं खरीद पा रहा है। इस कारण लोग सरकार व अस्पताल प्रशासन से बार-बार वैक्सीन की मांग कर रहे हैं।
सीएम के नाम लिखी शिकायत
केस 1 :
शहर के नागरिक समीर ने पीसीवी की सप्लाई नहीं होने की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। सीएम के नाम लिखी शिकायत में उसने कहा है कि उसके बच्चे को पीसीवी लगना था। सिविल अस्पताल गया तो यहां वैक्सीन नहीं होने की बात सामने आई। पीजीआई गया तो वहां भी वैक्सीन खरीद कर लाने के लिए कहा गया। आंगनबाड़ी तक में यह टीका उपलब्ध नहीं है। इस कारण टीकाकरण भी प्रभावित हो रहा है। सरकार बेहतर व्यवस्था बनाकर शिशुओं का स्वास्थ्य सुनिश्चित करे।
सरकार जल्द मुहैया कराए वैक्सीन
केस 2 :
प्रेम नगर में रहने वाली पिंकी शर्मा का कहना है कि बेटी को पीसीवी वैक्सीन लगना था। इसके लिए सिविल अस्पताल गए तो वैक्सीन नहीं होने की बात कही गई। इससे पहले उन्होंने एक महीने बाद आने को कहा था। अब भी वैक्सीन नहीं आया है। इससे बेटी को निमोनिया से सुरक्षा मिलना मुश्किल हो गया है। आंगनबाड़ी में गए तो यहां भी वैक्सीन नहीं मिला। बाजार में वैक्सीन महंगा है। सरकार आम आदमी के लिए अस्पतालों में यह सुविधा जल्द मुहैया कराए।
पीसीसी की दिक्कत है। यह वैक्सीन फिलहाल खत्म है। वैक्सीन विदेश से आना है। इसके खरीदने की तैयारी की जा चुकी है। जल्द ही वैक्सीन आ जाएगा। इसके बाद अस्पतालों में सप्लाई दी जाएगी।
डॉ. वीके बंसल, डायरेक्टर, मेटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ।