यदि बेटियों को मौका मिले तो वे मुश्किल से मुश्किल मुकाम भी हासिल कर सकतीं हैं। यह बेटी साक्षी ने कर दिखाया है। साक्षी खेल ही नहीं, हर काम में अव्वल है। साक्षी की मां सुदेश ने बताया कि उसे पहलवानी के साथ घर के काम भी बखूबी आते हैं। साक्षी के हाथों बने नमकीन चावल तो पूरे परिवार की पहली पसंद हैं। उसे सिलाई और ड्राइंग का भी शौक है। साक्षी का मां सुदेश अब ओलंपिक पदक विजेता बेटी के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। वे चाहती हैं कि बेटी जल्दी आए और वे उसे खूब सारा दुलार कर सकें। इधर, शुक्रवार को भी पूरे दिन साक्षी के सेक्टर-4 स्थित आवास में बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
दिल्ली से पहुंचे डीटीसी के अधिकारी, दी बधाई
बेटी की जीत पर साक्षी के पिता को बधाई देने डीटीसी के डिपो मैनेजर राजकुमार सैनी पहुंचे। उनके साथ ही उनके कई सहयोगियों ने घर आकर साक्षी की कामयाबी पर बधाई दी। सुखबीर मलिक ने बताया कि बृहस्पतिवार को खेल निदेशक चंडीगढ़ ने बधाई दी और कहा कि जब साक्षी हिंदुस्तान आएगी तो उसको अच्छी नौकरी अच्छे पद के साथ देंगे। हालांकि, उन्होंने इसका अधिक खुलासा नहीं किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की ओर से लोक जनशक्ति पार्टी के राज्य प्रधान बुके लेकर आए और साक्षी की जीत की बधाई दी।
गोहाना में खापें करेंगी साक्षी का सम्मान
साक्षी के आवास पहुंचे खाप प्रधानों ने उनके पिता सुखबीर और मां सुदेश को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि खापें साक्षी को मंच पर सम्मानित करेंगी। गढ़वाला खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप मलिक, नांदल खाप के महेंद्र नांदल, हुड्डा खाप के रामकरण हुड्डा, अहलावत खाप के जय सिंह, 84 खाप के हरदीप अहलावत, दहिया खाप के सुरेंद्र दहिया, सुरेंद्र दहिया, अठगामा के बलराज बोहर ने कहा कि गढ़वाला खाप गोहाना चबूतरा छिछड़ाना में यह स्वागत समारोह होगा। इसमें चीफ कोच एवं पूर्व ओलंपियन कुलदीप मलिक के हाथों साक्षी को सम्मानित किया जाएगा। इसमें गढ़वाला खाप के संरक्षक डॉ. वीर सिंह भी होंगे। इसमें पूरे देश के खापों के प्रधान शिरकत करेंगे।
साक्षी की काउंसलिंग कर देते थे हौसला, फलीभूत हुई मेहनत
रोहतक। जब भी साक्षी विपरीत परिस्थितियों में होती, उसकी काउंसिलिंग और हौसला देने में उसका पूरा परिवार और कोच जुट जाते। इससे साक्षी को आंतरिक मजबूती मिलती और वह आगे बढ़ने के प्रयास शुरू कर देती। इसी के बूते साक्षी इतिहास रच सकी। यह अहम जानकारी साक्षी के परिवार के करीबी और साई में बॉक्सिंग कोच सुरेंद्र दांगी ने दी। उन्होंने बताया कि साक्षी कई बार स्कोर बनाकर भी बायफाल चली जाती थी। वह अंत तक बगैर थके सोच समझकर खेले, इसके लिए अच्छी काउंसिलिंग और प्रेक्टिस जरूरी है। शुरुआत में साक्षी का अलग तरीका होता है और बाद में वह अपना स्टाइल बदलती है। वह कभी भी शुरुआत में अपनी पूरी ताकत नहीं लगाती। खिलाड़ी को मैदान में शक्ति के साथ तकनीक से विरोधी को पछाड़ना होता है। साक्षी का भी मास्टर दांव था, जिसे उन्होंने समय पर प्रयोग किया और सामने वाले को पस्त कर दिया।