लोगों ने बुधवार सुबह आंख खोली तो फिजा धुंध के आगोश में थी। पहले तो लोगों ने समझा कि सर्दी आ गई और साथ लाई है कोहरा। दिन चढ़ने के साथ लोग घर से बाहर निकले तो आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस करने लगे। दमा के पीड़ितों और बच्चों को अधिक दिक्कत महसूस हुई। जलन की वजह से दोपहिया वाहन चालकों की आंखों से आंसू निकल आए। यही हाल पैदल चलने वालों का भी रहा। कई लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी हुई तो उन्हें अस्पताल जाना पड़ गया। सुबह से शाम तक तकरीबन प्रत्येक नागरिक की जुबां पर यही सवाल रहा कि फिजा में इतनी धुंध और आंखों में जलन सी क्यों है?
दरअसल, चिकित्सकों और पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि दीपावली पर हुई आतिशबाजी, वाहनों और खेतों में जलाई गई पराली से निकले धुएं ने पर्यावरण को तो बिगाड़ ही दिया है, लोगों की सेहत को भी खराब कर सकता है। चिकित्सकों ने इस धुएं को साइलेंट किलर बताया है। क्योंकि लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर तत्काल के अलावा दीर्घकालिक हो सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि वातावरण में धुंध बनकर छाए धुएं से कैंसर तक हो सकता है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि फेफड़े को धुएं से बचाने के लिए एन-95 मास्क का प्रयोग करें, ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।
पीजीआईएमएस के पुलमोनारी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन (पीसीसीएम) विभाग के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीतू ने बताया कि वातावरण में फैले धुएं से अस्थमा और हृदय संबंधी रोगियों को अधिक समस्या हो सकती है। चिकित्सकों ने बताया कि इसकी वजह से सामान्य लोगों को सूखी खांसी, बलगम, सांस लेने में सीटी की आवाज आना, दम घुटना, गला खराब होना, आंखों में जलन जैसी समस्या हो सकती है। ऐसा होने पर लोगों को चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। डॉ. नीतू ने बताया कि धुएं से बचने के लिए आमजन को घर से निकलते ही एन-95 मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इससे कुछ हद तक बचाव हो सकता है। इस मास्क को लगाने के बाद सांस लेने में समस्या नहीं होगी। मास्क को दो से तीन दिन में बदल देना चाहिए। बाजार में इसकी कीमत 30 से 50 रुपये हो सकती है।
आंखों में जलन की समस्या बढ़ी
सड़क पर चलने वाले तो दूर घर में भी लोगों को आंखों में जलन हो रही है। इसकी मुख्य वजह वातावरण में फैला धुआं है। पीजीआईएमएस में नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. चांद सिंह ढुल का कहना है कि जहां सिर्फ धुआं है, वहां जलन होने के साथ एलर्जी हो रही है। जहां धुएं के साथ वातावरण में धूल भी है, वहां अधिक समस्या हो रही है। यदि किसी को आंखों संबंधी समस्या होती है तो वे तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
बुजुर्ग और छोटे बच्चों को अधिक दिक्कत
वातावरण में प्रदूषण की वजह से बुजुर्गों के अलावा सबसे अधिक दिक्कत छोटे बच्चों को हो रही है। बुधवार को कई बच्चों को अस्पताल में नैबुलाइज कराने के लिए परिजनों की कतार लगी रही। सामान्य अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अधिकतर मरीजों को सांस लेने में समस्या हो रही है। मरीजों को भाप दिलवाकर उपचार दिया जा रहा है। जब तक मौसम साफ न हो बच्चों को सुबह और शाम बाहर न निकलने दें।