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श्रीकृष्ण की कृपा से बर्बरीक बने श्याम : पप्पू शर्मा

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04सीटीके27..मदनलाल ढींगरा कम्युनिटी सेंटर में कथा के दूसरे दिन श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत : सं
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मदनलाल ढींगरा कम्युनिटी सेंटर में चल रही तीन दिवसीय श्याम बाबा की कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथावाचक पप्पू शर्मा ने अमृत वर्षा की। कथावाचक ने कहा कि बाबा श्याम को कलियुग का अवतार माना जाता है। बाबा श्याम को हारे का सहारा भी कहा जाता है।
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कथावाचक ने कहा कि महाभारत में वर्णित है कि भीम पुत्र घटोत्कच के बेटे बर्बरीक देवी के भक्त थे। उनकी तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां ने उन्हें तीन तीर प्रदान किए। इनमें से एक तीर इतना शक्तिशाली था कि इससे संपूर्ण पृथ्वी का विनाश किया जा सकता था।
कथावाचक ने कहा कि महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के सिर को नदी में बहा दिया। इस नदी से बर्बरीक का शीश बहता हुआ खाटू वांग नगरी में आ गया। इसके बाद यह नदी खाटू श्याम में विलुप्त हो गई।
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पप्पू शर्मा ने कहा कि श्याम कुंड में शीश मिलने पर बाबा श्याम का शीश चौहान वंश की नर्मदा देवी को सौंप दिया गया था। इसके बाद नर्मदा देवी ने गर्भ गृह में बाबा श्याम की स्थापना की। जिस जगह बाबा श्याम को खोदकर निकाला गया, वहां पर शाम कुंड बना दिया गया। यह अब भी मंदिर में स्थापित है।
वहीं, दूसरे दिन शाम भक्तों का जनसैलाब इस कदर उमड़ पड़ा कि पंडाल छोटा पड़ गया। खाटू श्याम परिवार के सदस्यों ने जहां बाबा को 56 भोग अर्पित किए, वहीं, भव्य आरती कर बाबा का आशीर्वाद लिया। श्याम परिवार के संस्थापक शिव एरन व जितेंद्र सोनी मौजूद रहे।
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