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पुस्तक मेले में विज्ञान की किताबें रहीं आकर्षण का केंद्र

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एमडीयू के टैगोर सभागार में आयोजित पुस्तक मेले में किताबों को देखते लोग। अमर उजाला
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एमडीयू में आयोजित पुस्तक मेले में विज्ञान की किताबें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। पाठकों की पसंद का केंद्र बिंदु रही इन पुस्तकों में ज्यादातर पाठ्यक्रम से जुड़ी बताई गईं हैं। मेले में साहित्य, योग समेत अन्य विषयों से जुड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रकाशकों की किताबें उपलब्ध रही। प्रकाशकों को पाठकों ने 5000 से ज्यादा पुस्तकें खरीदने का ऑर्डर बुक कराया है।
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बुधवार को तीसरे दिन टैगोर सभागार में पुस्तक मेला आयोजित किया गया। यहां विभिन्न नामी प्रकाशकों की 40 से अधिक स्टॉलें लगाई गईं। इन पर 300 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक की पुस्तकें उपलब्ध रहीं। विदेशी संस्करणों की भारतीय प्रकाशन में प्रतियां विशेष रूप से उपलब्ध रही। इन पर डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में ही कीमत दर्शाई गई थी। पुस्तक मेले में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रकाशकों ने अपनी कृतियां बिक्री के लिए रखी। मेले में बुधवार को स्नेह विशेष के काव्य संग्रह मन की बात, डॉ. मधुकांत की पुस्तक वृद्ध जीवन की कहानियां व डॉ. अशोक कुमार मंगलेश के संपादन में डॉ. मधुकांत की शैक्षिक नाटक रंगमंच और शिल्प पुस्तक का विमोचन भी हुआ। मेले में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे एमडीयू के डीन कॉलेजज डॉ. एएस मान, विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश पूनिया, कवि वीरेंद्र मधुर ने पुस्तकों का विमोचन किया। मंच संचालन प्रो. पुष्पा व पवन गहलोत ने किया। विवि के पुस्तकाल्याध्यक्ष डॉ. सतीश मलिक ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इस मौके पर डॉ. नसीब सिंह गिल, डॉ. सुमित गिल, डॉ. परमेल चौधरी, अर्चना कोचर, अंकुर अरोड़ा, डॉ. जनार्दन शर्मा, डॉ. आनंद शर्मा, बृजबाला उपस्थित रही।
पुस्तक मेला कोरोना के कारण दो साल बाद आयोजित किया गया है। विद्यार्थी ऑनलाइन की पढ़ाई कर रहे थे। लंबे समय के बाद उनका पुस्तकों से परिचय हुआ है। यहां देश विदेश के नामी प्रकाशकों की अच्छी पुस्तकें शामिल की गई हैं। यह विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए बेहतर है।
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- डॉ. राजेश कुमार, प्राध्यापक, अर्थशास्त्र, एमडीयू
पुस्तक मेला विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए लाभकारी है। यह किताबों को परखने का भी अवसर होता है। ऐसे मेले साल में तीन से चार बार लगने चाहिए। विदेशी प्रकाशकों की अच्छी पुस्तकें मेले में पाठकों की जरूरतें पूरी करने वाले रहे।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, पूर्व अधिष्ठाता प्रशासक, एमडीयू
विवि परिसर में एसएसबी की कोचिंग कर रही हूं। पुस्तक मेले में मिलिट्री साइकोलॉजी से जुड़ी किताबें देखने आई हूं। पहली बार इतना बड़ा व विदेशी प्रकाशकों की पुस्तकों से सजा मेला देख रही हूं। हर तरफ पुस्तकें हैं। इसमें पाठ्यक्रम, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, साहित्य, काव्य सभी तरह की पुस्तकें शामिल हैं।
- प्रिया, एसएसबी कोचिंग छात्रा
एमडीयू में पहली बार इतना बड़ा पुस्तक मेला देखा है। यहां पाठ्यक्रम व अन्य किताबें उपलब्ध हैं। एसएसबी कोचिंग के लिए किताब देख रही हूं। यहां अच्छी किताबें हैं। मेले में देश ही नहीं, विदेश से बड़े-बडे़ प्रकाशक भी आए हैं। इनमें ज्यादातर के तो नाम भी यहीं पता लगे हैं।
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- प्रेरणा, एसएसबी कोचिंग छात्रा
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