कोरोना वायरस के साइड इफेक्ट से लोग आहत हैं। महामारी के कारण लागू हुए लॉकडाउन में मृतकों का मोक्ष भी फंस गया है। लॉकडाउन में मरने वालों का न पिंड दान हो पा रहा है न गंगा में अस्थियों का विसर्जन। एसडीएम से अनुमति लेकर गंगा तट तक पहुंचने वालों को भी मायूस लौटना पड़ रहा है। इसकी वजह वहां मोक्ष की रस्म निभाने वाले पंडितों का नहीं मिलना है। ऐसे में लोग श्मशान में ही अपनों की अस्थियां रखने को विवश हैं। लॉकडाउन हटने के बाद इन्हें विधि-विधान के साथ गंगा में प्रवाहित किया जाएगा।
शरीर तो पीजीआई में विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दान कर दिया, अब पिंडदान का इंतजार
शहर के प्रेम नगर की हैफेड वाली गली में रहने वाले 80 वर्षीय जगदीश कपूर का 15 मार्च को निधन हो गया था। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन ने अपना शरीर पीजीआई के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दान करने की इच्छा जाहिर की थी। उनकी यह इच्छा पूरी करते हुए बेटे विनोद व दलीप ने शव पीजीआई को दान कर दिया। वहां से उनके नाखून व बाल मिले। अब परिवार को उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित कर उनके पिंडदान की रस्म अदा करनी है। उनके पोते रोहित ने बताया कि लॉकडाउन के चलते पहले तो हरिद्वार में गंगा तट तक पहुंचना ही मुश्किल है। फिर वहां पंडित का नहीं मिलना दादा के मोक्ष की प्रक्रिया को रोके हुए है। इसलिए अब लॉकडाउन के बाद ही वहां जाएंगे।
हरिद्वार में नहीं मिले पंडित
शहर में रहने वाले अनिल भाटिया के 62 वर्षीय भाई सुशील का निधन हो गया। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि मृतक की अस्थियां लेकर हरिद्वार गए थे। इसके लिए एसडीएम से अनुमति भी ली। वहां पहुंच कर भी मृतक के पिंडदान की रस्म पूरी नहीं हो पाई। पंडित नहीं मिलने से यह रस्म अधूरी रह गई। अब इसके लिए बाद में जाना होगा।
एसडीएम से अनुमति लेने पर भी जांच के लिए रास्ते में 20 जगहों पर रोका
प्रेम नगर में ही रहने वाले एक परिवार के बुजुर्ग का 17 मार्च को निधन हुआ था। यह परिवार मृतक के मोक्ष व पिंडदान के लिए रविवार को हरिद्वार गए। इसके लिए एसडीएम से अनुमति भी ली। इस अनुमति के बावजूद 20 जगहों पर उन्हें रोका गया। हर जगह जांच की प्रक्रिया से गुजरने के बाद गंगा तट तक पहुंचा। यहां पिंडदान के लिए पंडित ही नहीं मिला। इसलिए खुद ही अस्थियों का गंगा में विसर्जन करके लौट आए। अब पिंड दान के बाद दोबारा जाना होगा।
लॉकडाउन के चलते मृतक की अस्थियों का विसर्जन नहीं हो पा रहा है। मंदिर में छह लोगों की अस्थियां सुरक्षित रखी हैं। लॉकडाउन खुलने पर ही इनका विसर्जन हो पाएगा। तभी इनके परिजन अस्थियों को लेकर जाएंगे।
पंडित विनय चतुर्वेदी, पुजारी, रामबाग मंदिर।
जीवन-मरण के बंधन से बंधे लोग रोज अपनी आयु पूरी कर आत्मा से परमात्मा में विलीन हो रहे हैं। इन दिनों रामबाग में ऐसे रोजाना तीन मामले आ रहे हैं। लॉकडाउन के चलते मरने वाले का पिंडदान नहीं हो पा रहा है। यहां 22 मार्च से अब तक 32 लोगों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
सुरेंद्र बतरा, उपप्रधान, रामबाग सेवा समिति।
समिति प्रधान रमेश सहगल की देखरेख में समिति काम कर रही है। लॉकडाउन में रोजाना औसतन तीन मृतकों की अंत्येष्टि की जाती है। इनमें से ज्यादा अस्थियां ले जाते हैं। अब तक सात लोगों ने लॉकडाउन हटने तक अस्थियां यहीं रखवाई है। यहां 22 मार्च से अब तक 22 शवों का दाह संस्कार हो चुका है।
किशनलाल, मैनेजर, शिव मंदिर श्मशान भूमि।
लॉकडाउन के चलते 20 से ज्यादा लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया जा रहा है। यहां 22 मार्च से अब तक 11 शवों को अंतिम संस्कार हो चुका है। इनमें से दो महिलाएं व नौ पुरुष हैं। इनके परिजन अस्थियां ले गए हैं।
मनमोहन आजाद, प्रधान, श्मशान भूमि गोहाना रोड।
रोहतक। मृतकों का रिकार्ड जांचते रामबाग मंदिर के पुजारी पंडित विनय चतुर्वेदी।- फोटो : RohtakCity
रोहतक। लॉक डाउन के चलते रामबाग श्मशान भूमि में रखी अस्थियां।- फोटो : RohtakCity
रोहतक। शिव श्मशाम भूमि में सुरक्षित रखी गई अस्थियां।- फोटो : RohtakCity