नोटबंदी की किल्लत के चलते कैश की किल्लत से जूझ रहे लोग वीरवार को भी सुबह से शाम तक बैंकों की लाइन में लगे रहे। इस कतार में बड़ी संख्या में पेंशनर और सैलरी लेने वाले कर्मचारी भी खड़े नजर आए। पिछले दो दिनोें से कैश की बदहाली झेल रहे बैंकों में बहुत कम लोगाें को ही सैलरी और पेंशन मिल पाई। इस वजह से लोग बैंक प्रबंधकों पर बार-बार बिफरते रहे, लेकिन प्रबंधक भी कैश नहीं होने की वजह से मजबूर दिखाई दिए। चूंकि, रोहतक को पिछले दो दिनों से कैश नहीं मिला है और तीसरे दिन यानी एक दिसंबर को जो कैश मिला उसमें भी खानापूर्ति की गई इै। कैशलेस बैंकों की वजह से एटीएम भी खाली रहे। बोहर में ग्रामीण परेशान हो गए और एसबीआई के बाहर 20 मिनट तक जाम लगाए रखा। जिसे पुलिस कर्मियों ने पहुंचकर खुलवाया।
वीरवार को भी विभिन्न बैंकों की छोटी शाखाओं में कैश नहीं पहुंचा और उन्होंने कैश आउट का बोर्ड लटका दिया। ऐसे में उन बैंकों में हालात सबसे ज्यादा बेकाबू दिखाई दिए जिनमें पेंशनधारकों और सैलरी लेने वाले कर्मचारियों के सबसे ज्यादा खाते हैं। जहां लघु सचिवालय स्थित स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में सुबह साढ़े 11 बजे ही कैश खत्म हो गया। वहीं, एसबीआई की मुख्य शाखा में सुबह 11 बजे के बाद पेंशनर्स को टोकन देने बंद कर दिए गए। बैंक प्रबंधक ने 11 बजे से पहले ही करीब 270 पेंशनधारकों में टोकन बांट दिए थे। जिन्हें दस-दस हजार रुपये पेंशन दी गई। इसलिए बाकी पेंशनरों को टोकन देने से मना करने पर वे विरोध पर उतर आए।
सैलरी वालों को 5 तो पेंशनर को मिले 10 हजार
एसबीआई और पीएनबी की अधिकतर शाखाओं में काफी संख्या में सैलरी और पेंशनधारकों के खाते हैं। दोनों बैंकों के शाखा प्रबंधकों ने कैश को देखते हुए सैलरी कर्मचारियों और पेंशनर के बीच इसका बंटवारा किया। जहां सैलरी कर्मचारियों को पांच हजार ही रुपये दिए गए वहीं, पेंशनर को दस हजार रुपये दिए गए। जिससे कि उन्हें कुछ दिन के लिए दोबारा न आना पड़े। दूसरी ओर, एसबीआई में जमा करने वालों के लिए टोकन व्यवस्था बंद कर दी गई। वे लाइन में लगकर ही पुराने नोट जमा करा रहे हैं।
600 लोगाें को दी जा रही पेमेंट
एसबीआई की मुख्य शाखा के मैनेजर कैलाश कुमार ने बताया कि रोजाना 600 से 700 लोगों को पेमेंट दी जा रही है। अब जमा कराने वालों की लाइनें बहुत छोटी होती जा रही हैं। बैंकों में लोग केवल पैसे निकालने के लिए आ रहे हैं। सुबह नौ बजे से पहले उनकी शाखा में करीब 1000 लोग कतारों में खड़े होते हैं। जिन्हें 11 बजे तक कैश के मुताबिक टोकन बांट दिए जाते हैं।
मेरे पिताजी को लकवा है। उन्हें इलाज के लिए लखनऊ लेकर जाना है। इसलिए बैंक से 50 हजार रुपये निकालने आया था, ताकि उनका इलाज अच्छे से करा सकूं। पर, बैंक वालों ने शुक्रवार को कैश लेने के लिए कहा है। यह भी करीब पांच हजार ही मिलेगा।
- अशोक, ईस्माइला।
खाते में वेतन आ गया है और मैं सैलरी लेने के लिए आया हूं। स्कूल से छुट्टी करनी भी मुश्किल है। मुझे 20 हजार रुपये चाहिए थे, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने पांच हजार से ज्यादा देने के लिए मना कर दिया।
- अनिल, शिक्षक।
पिछले दो दिन से बैंक में पैसे निकलवाने के लिए आ रही हूं। बैंक न तो टोकन देता है और न ही पैसा। वीरवार को भी पैसे देने से मना कर दिया। इतनी धुंध में रोजाना आना भी मुश्किल है, लेकिन बैंक कर्मी सुनते ही नहीं।
- भतेरी, खरावड़।
साहब, बीमार हूं, मुझे पेंशन दो
एसबीआई की मुख्य शाखा में राम गोपाल कालोनी निवासी रणबीर अधिकारियों के सामने कहते दिखे कि साहब, मुझे पेंशन दो। मैं बीमार हूं और दोनों पैरों में काफी दर्द है। मेरा रोज-रोज बैंक आना भी बहुत मुश्किल है। इसलिए मेरी परेशानी को समझेें और पैसे दे दीजिए। इतना कहते ही ये रो पड़े, लेकिन बैंक कर्मी भी अपनी मजबूरी बताते रहे।