दिल्ली और ओडिसा को हराकर हरियाणा के लड़कों और लड़कियों की टीम बनी विजेता
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नेशनल स्कूल हॉकी स्पोर्ट्स चैंपियनशिप का खिताब हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपने नाम किया। अंडर-14 में लड़कों और लड़कियों की टीम ने दिल्ली और ओडिसा की टीम को कांटे की टक्कर देते हुए फाइनल मैच जीता। हालांकि फाइनल मैच में भी विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा और ओडिसा के खिलाड़ियोें ने रेफरी पर पक्षपात का आरोप लगाया। मैच हारने पर ओडिसा के खिलाड़ी भावुक हो गए। ऐसे में अधिकारियों ने उन्हें संभाला। इस मैच में बतौर मुख्य अतिथि अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास मौजूद थे।
बृहस्पतिवार को सुबह धुंध की वजह से फाइनल मुकाबला एक घंटे की देरी से शुरू हुआ। लड़कों का फाइनल मैच सुबह 10:15 बजे तो लड़कियों का मैच दोपहर 1 बजे शुरू हुआ। दोपहर दो बजे पुरस्कार वितरण के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। इस दौरान सरकारी और निजी स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने विजेता टीमों को ट्रॉफी और मेडल देकर सम्मानित किया गया।
हरियाणा की दोनों टीमें एक-एक गोल से जीती
इस चैंपियनशिप में लड़कियों की टीम के फाइनल मुकाबले में हरियाणा ने ओडिसा को 2-1 से मात दी। दोपहर एक बजे शुरू हुए मैच के पहले हाफ में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं। इसके बाद ओडिसा की टीम ने एक गोल करके बढ़त बनाई। थोड़ी ही देर बाद हरियाणा टीम की कप्तान दीपिका ने एक गोल करके स्कार बराबर पर लाकर खड़ा कर दिया। इस बीच हरियाणा को कई पेनल्टी कॉर्नर मिले, बावजूद खिलाड़ी इसे गोल में तब्दील नहीं कर सके। मैच खत्म होने के कुछ ही समय पहले बदलाव के तौर पर टीम में शामिल की गई खिलाड़ी गुरमेल ने हरियाणा की ओर से गोल कर टीम को जीत दिलाई। दूसरी ओर, लड़कों के फाइनल मैच में हरियाणा और दिल्ली का मुकाबला हुआ। जिसमें हरियाणा ने दिल्ली की टीम को 2-1 से पराजित किया।
रोहतक की रेवड़ी लेकर गए साथ
शिक्षाविभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर आरपी सांगवान और मंडल आयुक्त चंद्रप्रकाश की घोषणा अनुसार सभी राज्यों की टीमों, इंचार्जों और कोचों को रोहतक की रेवड़ी भी दी गई।
ओवरएज खिलाड़ियों को न खिलाएं: सांगवान
शिक्षाविभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर आरपी सांगवान ने कहा कि नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में कुछ राज्यों की टीमें ओवरएज खिलाड़ियों को लेकर आए हुई थी। दूसरी टीमों ने इसका आरोप भी लगाया है। यह गलत है। सही उम्र और योग्यता के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दें।