सरकार ने ऐसे स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है, जहां पर 20 से कम विद्यार्थी है। यह कदम प्रदेश के सरकारी हाई स्कूलों और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षक की बढ़ती कमी को देखते हुए उठाया गया है। इन स्कूलों को बंद कर विद्यार्थियों को नजदीक के स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा। इससे प्रत्येक बच्चे को शिक्षक मिल सकेंगे और शिक्षा का स्तर भी सुधरेगा। सीएम मनोहर लाल ने खुद इस मसले पर रुचि दिखाते हुए प्रदेश के 9वीं से 12वीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों की संख्या मांगी है। 20 से कम छात्र संख्या वाली सूची में जिले के दो उच्च स्कूल शामिल हैैं। वहीं, जीरो से 100 छात्र संख्या के बीच 9वीं और 10वीं के 40 स्कूल शामिल हैं तो 11वीं और 12वीं के 24 स्कूल हैं।
सेकेंडरी शिक्षा विभाग के निदेशक ने बृहस्पतिवार को 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों की छात्र संख्या मांगी है। इसे देने के लिए विभाग में देर शाम तक शिक्षा अधिकारी जुटे रहे। डीईओ सुनीता रूहिल ने सभी ब्लॉकों के शिक्षा अधिकारियों की एक बैठक बुलाई और रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद इसे विभाग के निदेशक के पास ई-मेल से भेजा गया।
उच्च अधिकारियों को भेज दी रिपोर्ट
सेकेंडरी शिक्षा विभाग के निदेशक ने 9वीं से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या का ब्योरा मांगा है। उनके आदेशानुसार 0 से 100 तक के बीच चारों कक्षाओं की छात्र संख्या की रिपोर्ट निदेशालय में भेज दी गई है। अगली कार्रवाई भी उच्च अधिकारियों के आदेशों के तहत ही की जाएगी।
- सुनीता रूहिल, जिला शिक्षा अधिकारी, रोहतक।