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वादाखिलाफी हुई तो 31 अगस्त से पहले भी कर सकते हैं आंदोलन : यशपाल मलिक

Wed, 22 Jun 2016 02:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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जसिया में आयोजित समिति के सम्मान समारोह में पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष - फोटो : amar ujala
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि आरक्षण से ज्यादा जाटों ने सम्मान की लड़ाई लड़ी है। जिन लोगों ने समाज के लिए अपनी जान दी है उनकी शहादत को भुलाया नहीं जा सकता है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वार्ता के बाद धरने स्थगित किए गए हैं, खत्म नहीं हुए है। यदि उनके साथ इस बार वादाखिलाफी हुई तो धरने फिर शुरू कर दिए जाएंगे। किसी भी कीमत पर उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक मंगलवार को जसिया में आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जाट संविधान के अनुसार अपना हक मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार जाटों को राज्यों के सीमा बंटवारे में अलग करना चाहती है। अब जाट किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। उन्होंने आह्वान किया कि जाट एकजुट हैं और अब एकजुटता के साथ ही लड़ाई लड़ी जाएगी। खुले मंच से उन्होंने सरकार को चेतावनी दी। कहा कि सरकार यह न सोचे कि धरने खत्म करा दिए गए हैं, तो जाट शांत हो गए। सरकार को केवल दो माह का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में सरकार ने एक भी वादाखिलाफी की तो जाट आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में 31 अगस्त से पहले भी आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

उनके बोलने से पहले बोलने लगते आंसू ...

रोहतक। अपने परिजन की मौत पर मुआवजा लेना टूटी-बिखरी जिंदगी को फिर से जोड़ने और आगे बढ़ाने की उनकी मजबूरी थी। मुआवजा लेते समय जहां उनकी आंखों में आंसू थे, वहीं गला भर आया था। कुछ भी बोलने से पहले आंसू बोलने लगते। अमर उजाला ने जब इनसे बात की तो अधिकतर का यही हाल था। रुंधे गले से बहुत कम शब्दों में उन्होंने दर्द को बयां किया। चेहरों की उदासी और आंखों के आंसू शब्दों से अधिक बता रहे थे।
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1- डीघल गांव के रहने वाले मृतक अनिल की मां संतोष और छोटा भाई राकेश कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि अनिल डीघल टोल पर काम करता था। उसी की नौकरी के भरोसे परिवार को दो वक्त की रोटी मिल रही थी। आंखों से बहते आंसुओं को रोकने का प्रयास करती हुई भीगे गले से अनिल की मां संतोष ने बताया कि उनका बेटा घर से ड्यूटी के लिए गया था, लेकिन कुछ घंटे बाद उसके मौत की खबर आई। इस कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार का आसरा टूट गया। आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। समाज की तरफ से मदद तो मिल रही है, लेकिन इससे पूरी जिंदगी तो नहीं कट सकती।

2- अकेहडी मदनपुर जिला झज्जर के रहने वाले अर्जुन जाखड़ के पिता सुमेर सिंह मुआवजा पाकर भावुक हो गए। उनका कहना था कि 12वीं के बाद बेटे को आईटीआई की तैयारी करा रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उसका साथ चंद दिनों का है। घटना वाले दिन वह किसी काम से घर से निकला था। वह तो लौटकर नहीं आया आई तो उसकी मौत की खबर। चंद पलों में सपने खाक हो गए।

दो मासूम बेटियों के साथ पहुंची पति की मौत का मुआवजा लेने

आहुलाना सोनीपत के रहने वाले अजय मलिक की पत्नी मीनू दो मासूम बेटियों के साथ आई थीं। मीनू ने बताया कि वह परिवार के साथ रोहतक की कमला नगर कॉलोनी में रहती हैं। पति की मौत के बाद परिवार में कमाई का जरिया खत्म हो गया है। दो मासूम बेटियों को पालने की जिम्मेदारी है। उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च तो दूर दो वक्त की रोटी मिलनी मुश्किल हो रही है। घरेलू विवाद की वजह से मीनू को मुआवजा नहीं मिल सका। उनकी सास ओमपति भी आई थी, जो अपनी बेटी के साथ रहती हैं। मुआवजे के लिए दो हकदार जानकर कमेटी ने फैसला लिया कि इस पर एक-दो दिन में कोई निर्णय लिया जाएगा।
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