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ASI Suicide: बेटे विहान को सेना में अफसर बनाना चाहते थे एएसआई संदीप, भांजे को भी साथ रखकर करा रहे थे पढ़ाई

Wed, 15 Oct 2025 02:25 PM IST
शाहरुख खान विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक

सार

रोहतक में सुसाइड करने वाले साइबर सेल के एएसआई संदीप लाठर बेटे विहान को सेना में अफसर बनाना चाहते थे। तीनों बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान रखते थे। वो भांजे को साथ रखकर पढ़ा रहे थे।
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15 अगस्त पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने किया एएसआई संदीप को सम्मानित किया था - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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रोहतक में सुसाइड करने वाले साइबर सेल के एएसआई संदीप लाठर के साथ उसके बच्चों के सिर से पिता का साया भी चला गया है। संदीप तीसरी कक्षा में पढ़ रहे अपने बेटे को सेना में अफसर बनाना चाहते थे। 
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सुसाइड से स्तब्ध सुखपुरा चौक स्थित पुलिस क्वार्टर में रह रहे परिजनों की नम आंखें और कंपकंपाते होठों से मंगलवार शाम यही दर्द फूटा। परिजन बताते हैं कि संदीप बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को लेकर बेहद गंभीर थे। बड़ी बेटी प्रतिभा को सीकर पढ़ने के लिए भेजा है। 

वह 10वीं की पढ़ाई कर रही है। छोटी बेटी रूपक नौवीं की छात्रा है। उसे भी बाहर भेजने की तैयारी में थे। बेटे विहान को सेना में भेजने के लिए सैनिक स्कूल या ऐसी ही किसी दूसरी संस्था से तैयारी कराने का इरादा था।
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तीन साल से भांजे को भी पढ़ा रहा था संदीप
वे बहनों और दूसरे परिजनों के बच्चों को भी हमेशा प्रोत्साहित करते थे। बहनों के बच्चों को अपने पास रख कर पढ़ाया भी है। पिछले तीन साल से भांजे हर्ष को भी साथ रखकर पढ़ा रहे थे। फिलहाल हर्ष 12वीं में है। संदीप ने उसे मेडिकल की तैयारी कराने का वादा किया था।
 

हर्ष बोला-मामा को ऐसा नहीं करना चाहिए था
मामा की मौत की खबर के बाद डबडबाई आंखों से हर्ष ने कहा कि मामा को ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कदम गलत उठाया। हमें किसके सहारे छोड़ गए। घर में एएसआई की बुजुर्ग मां इंद्रावती और पत्नी संतोष ही हैं। इनका सहारा यही बच्चे हैं।

पांच बहनों में अकेले थे संदीप, मां और पत्नी को बताया हादसा
संदीप पांच बहनों में अकेले थे। तीन बहनों के बाद पैदा हुए संदीप पर बड़ी-छोटी बहनें खूब प्यार उड़ेलती थीं। संदीप की मौत की खबर से पुलिस क्वार्टरों में सन्नाटा पसर गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद यहां पहुंचे लोगों को भी मामला सड़क हादसा का बताकर लाढ़ौत भेज दिया गया। घर में मौजूद बुजुर्ग मां व एएसआई की पत्नी संतोष को यही कहा गया है कि संदीप का एक्सीडेंट हो गया है।

संदीप को स्वतंत्रता दिवस पर सीएम ने किया था सम्मानित
एएसआई संदीप का परिवार सेवा और त्याग की परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके पिता दयानंद भी पुलिस इंस्पेक्टर थे। सेवानिवृत्त के बाद करीब 20 वर्ष पहले वे ट्रेन से सफर के दौरान हादसे का शिकार हो गए थे। संदीप के दादा भरत सिंह और छोटे दादा ने सेना में सेवाएं दी थीं।
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छोटे दादा ने बर्मा (अब म्यांमार) में लड़ाई लड़ी और सात साल जेल भी काटी थी। उन्हीं से प्रेरित होकर संदीप ने पुलिस की नौकरी चुनी थी। क्राइम ब्रांच में शानदार सेवाओं के लिए बीते स्वतंत्रता दिवस समारोह में सीएम नायब सिंह सैनी ने उन्हें सम्मानित भी किया था।
 
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