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मांगें नहीं मानी तो डॉक्टर बंद कर देंगे काम

Fri, 27 May 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन - फोटो : amar ujala
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एचसीएमएस डॉक्टरों ने अब मांगों को मनवाने के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने विभाग को चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी जाती तो अब राज्य स्तरीय बैठक कर काम बंद कर दिया जाएगा। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल के आश्वासन भी महज घोषणाओं तक सिमटे हैं। अभी तक एक भी डॉक्टरों की मांग पूरी नहीं हुई है। बृहस्पतिवार को प्रदेशभर के डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगाकर कार्य कर सरकार को अंतिम चेतावनी भी दे दी।
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प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि यदि डॉक्टरों को सुविधाएं नहीं दी जाएंगी तो नए डॉक्टर कहां से आएंगे। एक डॉक्टर विभाग में आता है और कई छोड़ कर जाते हैं। ऐसे में महिला डॉक्टरों की सीसीएल रद कर दी गई हैं। मेवात व नारनौल में डॉक्टरों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं। यहां कोई डॉक्टर नहीं जा रहा है, क्योंकि सरकार की ओर से अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता। इन रिक्तियों पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से डॉक्टरों को भेजा जा रहा है। इसके लिए एक साल का रोस्टर बनाया गया है और हर डॉक्टर के लिए इसे जरूरी किया गया है। उन्होंने विभाग की पोल खोलते हुए कहा कि एक डॉक्टर अपनी ओपीडी में अधिकतम 50 मरीज ही देख सकता है, लेकिन 200 से 250 मरीजों की ओपीडी हो रही है। जिला अस्पतालों में एमआरआई और सिटी स्कैन शुरू करने की बात होती है, जबकि रेडियोलोजिस्ट तक विभाग में नहीं हैं। डिप्लोमा धारक अल्ट्रासोनोलोजिस्टों के भरोसे यहां जांच होती है। अस्पतालों में दवाएं नहीं है, जबकि एमएलए हॉस्टल में देखें तो सभी ब्रांड की दवाएं उपलब्ध हैं।

सरकार बजट जारी करती है, लेकिन अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रयोग होता है, जबकि डॉक्टरों के लिए कुछ भी नहीं होता। उनके मेडिकल आफिसर की पोस्टमार्टम, आपातकालीन ड्यूटी लगाई जाती है और कोई लाभ नहीं दिया जाता। जबकि पोस्टमार्टम ड्यूटी फोरेंसिक विभाग के डॉक्टर की लगाई जानी चाहिए। इसके लिए प्रति पोस्टमार्टम हमारे डॉक्टरों को चार रुपये अलाउंस मिलता है, यह डॉक्टर के साथ मजाक नहीं तो क्या है। अस्पतालों में कोई भी डॉक्टर सुरक्षित नहीं है और न ही डॉक्टरों की पदोन्नति और बेसिक पे स्केल सही है। पीजीआई में एक एमडी की जो सैलरी चार साल में होती है, वह स्वास्थ्य विभाग में 15 साल में होती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर ठहर कर काम करना क्यों पसंद करेगा। उन्होंने कहा कि जब विभाग को जरूरत होती है, बगैर नोटिस व टाइम पीरियड के उनका तबादला कर दिया जाता है। इसके लिए एमसीआई फटकार भी लगा चुकी है। इस मौके पर प्रदेश भर से आए एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ. राजेश श्योकंद, डॉ. एम.पी. सिंह, डॉ. शीलकांत पजनी, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. शिव प्रसाद यादव और डॉ. विशाल चौधरी मौजूद रहे।
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डॉक्टरों ने लगाए काले बिल्ले

बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की मांगों के समर्थन में पीजीआई के डॉक्टरों ने भी काले बिल्ले लगाकर काम किया। जिले के सरकारी अस्पताल व पीएचसी और सीएचसी में भी डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगाए।
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