नगर निगम की गौशाला में अव्यवस्था के कारण लगातार गौवंश मर रहे हैं। गौवंश की बेकद्री का मामला अब तूल पकड़ गया है। एक दिन पहले ही निगम गौशाला से गौवंश को अखिल भारतीय गौशाला में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई। लेकिन बृहस्पतिवार को इस योजना पर पानी फिर गया। गौशाला प्रधान ने साफ कह दिया कि निगम पर पहले ही उनका 1.4 करोड़ रुपया बकाया है। बकाया मिलने के बाद ही गौवंश दोबारा रखे जाएंगे। दूसरी ओर मेयर और पार्षदों ने डीसी से मिलकर व्यवस्था 15 दिन में ठीक कराने के लिए कहा। चेतावनी दी कि व्यवस्था नहीं सुधरने पर गौवंश को मुक्त करा लिया जाएगा। हालांकि डीसी ने अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निगम गौशाला में दिनरात काम कर इसे जल्द ठीक करें।
पहरावर स्थित नगर निगम की गौशाला में पूरी तरह से अव्यवस्था फैली हुई है। 6 माह पहले बनी इस गौशाला में दो माह के अंदर ही 135 पशुओं की मौत हो चुकी है। इसे लेकर पार्षद भड़के हुए हैं। पार्षद सूरजमल रोज, अनिल कुमार, बलराज उर्फ बल्लू ने बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा के साथ गौशाला का निरीक्षण किया था। वहां तय किया गया कि निगम की गौशाला का निर्माण पूरा होने तक यहां के गौवंश को पास ही अखिल भारतीय गौशाला में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को मेयर रेनू डाबला के साथ पार्षद बलराज उर्फ बल्लू, पार्षद पति सूरजमल किलोई, पार्षद अनिल, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू के पति बिजेंद्र हुड्डा, अनीता मिगलानी ने डीसी से मुलाकात की।
उन्होंने डीसी से कहा कि वहां चारा भी ठीक नहीं मिल रहा है और गर्मी में गौवंश की हालत खराब है। डीसी अतुल कुमार ने एक्सईएन समेत अन्य अधिकारियों से बातचीत करते हुए काम को तेजी से करने के आदेश दिए। आश्वासन दिया कि गौवंश को मरने नहीं दिया जाएगा। पार्षदों ने साफ चेतावनी दी कि यदि 15 दिन में हालात ठीक नहीं किए गए तो सभी गौवंश को वहां से मुक्त करा दिया जाएगा। वहीं अखिल भारतीय गौशाला, पहरावर के प्रधान नरेश शर्मा ने कहा कि निगम ने गौशाला के निर्माण से पहले भी उनके यहां गौवंश रखे थे और 50 रुपये प्रति गौवंश देने के लिए कहा गया था। जिसके 1.40 करोड़ रुपये निगम पर अभी बकाया है और उसके लिए उनको कोर्ट में जाना पड़ा। ऐसे हालात में वह गौवंश नहीं रख सकते हैं और उनकी ऐसे ही मदद करते रहेंगे। अगर उनको बकाया रुपया दिया जाए तो वह गौवंश रखने के लिए तैयार हैं।
मिट्टी उठाने पर लगवाई रोक
पहरावर में गौशाला का भराव करने के लिए सुनारिया गांव से मिट्टी उठाई जा रही थी। एक्सईएन बीके पठानिया ने बताया कि बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने मिट्टी खुदाई का कार्य रुकवा दिया। यहां से रोजाना खुदाई करके मिट्टी लाई जा रही थी। एक्सईएन ने बताया कि जिस जगह से मिट्टी उठाई जा रही है, वह नगर निगम की जमीन है। जबकि पार्षद का आरोप है कि मिट्टी खुदाई के नाम पर सैकड़ों पौधों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस तरह गौशाला के काम में अड़चन खड़ी हो रही है और वहां के पार्षद से बात करके मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
यूं बोले मेयर और पार्षद
हमने डीसी से मिलकर समाधान की बात रखी थी। लेकिन उनकी ओर से किसी तरह से रुख साफ नहीं किया गया। अब इसके लिए सभी पार्षद के साथ मिलकर व्यवस्था सुधारी जाएगी। इससे गौवंश को बचाया जा सके और उनको कोई परेशानी नहीं हो।
रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
हमने पहले योजना बनाई थी कि जब तक निगम की गौशाला का निर्माण पूरा नहीं होता है तब तक अखिल भारतीय गौशाला में गौवंश को रखवा दिया जाएगा और निगम की ओर से खर्च दे दिया जाएगा। लेकिन अब मामला उलझ गया है और निगम की गौशाला में व्यवस्था ठीक कराने में लगे हैं। शुक्रवार को जाकर फिर से निरीक्षण किया जाएगा और व्यवस्था का जायजा लिया जाएगा।
सूरजमल रोज, पार्षद
गौशाला में व्यवस्था सुधारने का जिम्मा पार्षद खुद उठाएंगे। इसके लिए समय-समय पर वहां जाकर निरीक्षण किया जाएगा। गौवंश की पूरी देखभाल की जाएगी। ध्यान रखा जाएगा कि उनको खानपान, चारा, पानी सब कुछ बेहतर मिले। उसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
बलराज उर्फ बल्लू, पार्षद नगर निगम
गौशाला में पार्षद खुद नजर रखेंगे कि व्यवस्था में रोजाना कितना सुधार हो रहा है। इसके लिए वहां के चारे के रजिस्टर से लेकर अन्य कागज भी देखे जाएंगे। हम पूरी नजर रखेंगे। क्योंकि यही एक रास्ता बचा है कि व्यवस्था को सुधारकर गौवंश को बचाया जा सके।
अनिल कुमार, पार्षद नगर निगम।