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हरियाणा: कोरोना मृतकों को अंतिम यात्रा पर रवाना करते हैं एसीआई नरेंद्र, दिन में तीन बार बदलते हैं पीपीई किट

Sat, 24 Apr 2021 12:01 PM IST
निवेदिता वर्मा विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक

सार

नरेंद्र का पांच साल का मासूम बेटा तक पापा की ड्यूटी समझ चुका है। जैसे ही नरेंद्र घर के दरवाजे पर पहुंचते हैं, बेटा अंदर कमरे में जाकर छिप जाता है। कहता है कि मम्मी ने बताया हुआ है कि पापा की ड्यूटी कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार कराने की है।  
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वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान में कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार करते हुए नरेंद्र यादव व उनकी टीम।  - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस कोरोना काल में कुछ लोग निस्वार्थ सेवा में जुटे हुए हैं। रोहतक नगर निगम के सहायक सफाई निरीक्षक नरेंद्र यादव सही मायनों में कोरोना योद्धा साबित हो रहे हैं। कोरोना काल में अब तक प्रोटोकाल के तहत वे 589 कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार करवा चुके हैं। अब तो उनका पांच साल का मासूम बेटा तक पापा की ड्यूटी समझ चुका है। जैसे ही नरेंद्र घर के दरवाजे पर पहुंचते हैं, बेटा अंदर कमरे में जाकर छिप जाता है। कहता है कि मम्मी ने बताया हुआ है कि पापा की ड्यूटी कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार कराने की है। नगर निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा से लेकर मेयर मनमोहन गोयल तक नरेंद्र यादव की पीठ थपथपा चुके हैं।

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पिछले साल निगम प्रशासन के सामने कोरोना संक्रमित शवों के संस्कार की जिम्मेदारी सौंपने की समस्या आ गई थी। एक तो कोरोना जैसी घातक बीमारी, ऊपर से धार्मिक रीति-रिवाज का भी गहराई से ज्ञान होना आवश्यक है। निगम प्रशासन ने शवों के संस्कार के लिए वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान व दफनाने के लिए जींद रोड स्थित कब्रिस्तान का चयन किया। 


वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान वार्ड नंबर 18 में आता है, ऐसे में निगम आयुक्त ने निर्देश दिए कि जिस एसआई की ड्यूटी वार्ड में है, उसी को संस्कार करवाने पड़ेंगे। एसआई नरेंद्र यादव ने बिना देर किए यह जिम्मेदारी ली। एसीओ शांत सुहाग के साथ नरेंद्र यादव की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण है। अमर उजाला से खास बातचीत में नरेंद्र यादव ने एक साल की ड्यूटी के बारे में खुलकर बताया। 

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सुबह 7 बजे ही निकलना पड़ता है घर से

पीजीआई में न केवल रोहतक, बल्कि आसपास के जिलों के भी कोरोना संक्रमित मरीज दाखिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर मृतकों की संख्या भी बढ़ रही है। नरेंद्र यादव बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह से तो रात को ही स्वास्थ्य विभाग की तरफ से शवों की सूचना आ जाती है। अगले दिन कितने संस्कार किए जाने हैं। क्योंकि निगम पहले आठ, फिर 12 और अब दो दिन से हर रोज 23-23 शवों के संस्कार करवा रहा है। इस कारण सुबह 7 बजे ही घर से निकलता पड़ता है।

शान में जाकर साथी कर्मचारियों के साथ चिता तैयार करवाई जाती है। पीजीआई से जैसे ही शव आते हैं, तभी एक-एक करके उनके संस्कार की प्रक्रिया शुरू होती है। एक साथ कभी चार तो कभी छह चिताएं जलती हैं। इसके लिए दिन में दो तो कभी तीन बार पीपीई किट बदलनी पड़ती है। 

एक शव में लगती है 15 मन लकड़ी, श्मशान प्रबंधन समिति करवा रही उपलब्ध 
नरेंद्र ने बताया कि एक शव के संस्कार की तैयारी में एक घंटा लग जाता है। एक संस्कार के लिए 15 मन लकड़ियां श्मशान समिति की तरफ से उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके बदले मृतक के परिजन रसीद कटवाते हैं। बाकी अगर परिजन घी या दूसरी सामग्री लेते हैं तो उसकी भी सुविधा उपलब्ध है। संस्कार के दौरान कोरोना से बचाव के नियमों का खास ध्यान रखा जाता है। 
 
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संस्कार के दिन कार्यालय में आने की मनाही

निगम प्रशासन ने कोरोना संक्रमण में जुटी टीम को हिदायत दे रखी है कि जिस दिन संस्कार करवाएं, उस दिन कार्यालय में न आएं।  

निगम का कर्मचारी एसआई नरेंद्र यादव एक कोरोना योद्धा की तरह काम कर रहा है। एक साल से सैकड़ों शवों का संस्कार करवा चुका है। कभी ड्यूटी से ना-नुकर नहीं की। बाकी टीम के सदस्य भी उसका साथ देते हैं। कोरोना संक्रमित शवों की बढ़ती संख्या के चलते टीम में चार नए सदस्य और जोड़े गए हैं।  - प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
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