एक तरफ जहां फिर आंदोलन की आहट है, वहीं दूसरी ओर पिछले दंगों के पीड़ित अपनी सुरक्षा की तैयारी करने लगे हैं। उनका कहना है कि इस बार वह अपनी दुकान या प्रतिष्ठान को दंगाइयों के हवाले नहीं होने देंगे। पिछली बार सबकुछ अचानक हो गया, लेकिन इस पर हम एकजुट हैं। किसी भी तरीके से दंगाइयों का मुकाबला किया जाएगा। कोई अपने लाइसेंसी हथियारों से सुरक्षा करेगा तो कोई लाठी-डंडे लेकर डटा रहेगा। दुकानों और प्रतिष्ठानों में किसी ने मजबूत शटर लगवाएं हैं तो किसी ने सेंटर लॉक और नाइट विजन कैमरे लगवाए हैं। वहीं, दंगों में जिनकी दुकान या प्रतिष्ठान जल गए थे उनमें से कइयों ने उन्हें ठीक कराने का काम रुकवा दिया है।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दंगाइयों ने दुकानों, मॉल, शोरूम और अन्य जगहों पर जमकर लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की थी। लोगों की जिंदगी भर की कमाई लूट ली और आग लगाकर बर्बाद कर दिया गया। सरकार ने मुआवजा दिया, लेकिन नाकाफी साबित हो रहा है। इस कारण किसी ने बैंक से लोन लेकर तो किसी ने दोस्तों और रिश्तेदारों से ब्याज पर पैसे लेकर फिर से व्यापार शुरू किया है। किसी ने व्यापार शुरू कर लिया है तो कोई शुरू करने की तैयारी में दुकानों को ठीक करा रहा है। लेकिन इसी बीच फिर आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। इस डर से कई लोगों ने अपनी दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को दोबारा शुरू करने के लिए ठीक कराने का काम रोक दिया है। उन्हें डर सता रहा है कि यदि फिर बवाल हुआ तो उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
डर के बीच व्यापारी दंगाइयों से मुकाबला करने के लिए कमर कसे हुए हैं। व्यापारी खुद को एकजुट बता रहे हैं और वह किसी भी अप्रिय घटना से मुकाबला करने के लिए डटे रहने का दावा कर रहे हैं। जिनके पास लाइसेंसी हथियार है, वह उनके सहारे हर किसी की सुरक्षा करेंगे तो कोई लाठी-डंडों का सहारा लेगा। इसी तरह व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों और दुकानों को मजबूत कर लिया है। फिर भी व्यापारी कहते हैं कि जैसा दंगा पहले हुआ वैसा कभी नहीं होना चाहिए। सरकार बातचीत करके मामले को सुलझाए तो सभी के लिए बेहतर होगा।
इस बार कोई चूक न हो, इसके लिए सभी इंतजाम पुख्ता कर लिए हैं। इस बार उपद्रवी होटल के पास आ भी गए तो लाइसेंसी हथियारों के साथ होटल बचाने के लिए परिवार सहित डटे रहेंगे, लेकिन प्रॉपर्टी को नुकसान नहीं होने देंगे। पिछली बार दंगाइयों ने 80 लाख रुपये का नुकसान किया था और केवल 32 लाख रुपये मुआवजा मिला है।
- विनोद, नटराज होटल
जिस तरह से पहले दंगे में दुकान जलाई गई, उसको देखते हुए सेंटर लॉक ज्यादा मजबूत किए हैं, जिससे शटर को कोई खोल नहीं सके। इस बार व्यापार तबाह नहीं होने देंगे। उसे बचाने के लिए डटे रहेंगे। पहले भी दुकान बचाने के लिए उपद्रवियों के सामने हाथ जोड़े, लेकिन वह नहीं माने। हमारा करीब 14 लाख का नुकसान हुआ था।
- अतुल गुलाटी, दीप बुक डिपो
पहले भी दुकान छोड़कर नहीं गए थे इस बार भी नहीं जाएंगे। दुकान का शटर पहले से ज्यादा मजबूत कर दिया गया है। दुकान की सुरक्षा को देखते हुए सेंटर लॉक लगा दिए हैं और नई तरह के ताले लगाए हैं। उम्मीद है कि इस बार प्रशासन और सरकार मुस्तैदी से उपद्रवियों का सामना करेंगे और आम जनता को नुकसान नहीं होने देंगे।
- योगेश, टिंकू बुक डिपो
पहले का जख्म भर भी नहीं पाया कि फिर से आंदोलन की धमकी। अब इतनी हिम्मत नहीं बची है कि दोबारा से सामना कर सकें। बैंक से लोन और दोस्तों व रिश्तेदारों से कर्ज लेकर फिर से कारोबार खड़ा किया है। अगर फिर से ऐसा कुछ होता है तो सबकुछ खत्म हो जाएगा। इस बार पहले जैसी घटना न घटे, इसके लिए पांच लाख रुपये खर्च करके सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। स्पेशल नाइट रिकार्डिंग कैमरे लगाए हैं, जो बिजली नहीं होने पर भी 72 घंटे काम करेंगे। सेंटर लॉक को ज्यादा मजबूत बनाया गया है और सायरन लगाया गया है।
- रमन गुप्ता, आर्चिज गैलरी
दंगाइयों ने पूरी मार्केट को जला दिया था, जिससे मेडिकल स्टोर व कार दोनों जल गए। इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मार्केट पर बड़ा गेट लगवाया गया है, जिससे दंगाई अंदर ना घुस सकें। किसी तरह का आंदोलन होता है तो बच्चों को पहले ही सेफ जगह भेज दिया जाएगा। लाठी-डंडे लेकर सभी व्यापारी एकजुट होकर प्रतिष्ठान बचाने के लिए डटे रहेंगे। पहले अचानक दंगा होने से कोई एकजुट नहीं हो सका था।
- शिवकुमार, मेडिकल स्टोर शांति मार्केट
हमारी बेकरी व दूध एजेंसी को दंगाइयों ने जला दिया था। उसे दोबारा शुरू करने के लिए काम करा रहे थे, लेकिन फिर से आंदोलन की आहट होने पर काम रोक दिया है। असमंजस में हैं कि काम कराए या नहीं। पहले ही बड़ा नुकसान हो गया है और मुआवजा भी पूरा नहीं मिला है। यह जरूर है कि सभी व्यापारी एकजुट होकर डटे रहेंगे। जिसके पास लाइसेंसी हथियार होगा वह उससे सुरक्षा करेगा।
- मनदीप, बेकरी मालिक सुखपुरा चौक
हलवाई की दुकान के सहारे परिवार का गुजारा होता है, लेकिन दंगाइयों ने जलाकर राख कर दिया था। एक सप्ताह पहले ही फिर से दुकान को शुरू किया है। दुकान शुरू जरूर कर दी है, लेकिन डर सता रहा है कि कोई दिक्कत न हो जाए। सुरक्षा के लिए सेंटर लॉक लगवाए हैं। सभी व्यापारी इकट्ठे हो चुके हैं। दंगाइयों से निपटने के लिए एकजुटता हो चुकी है।
- शमशेर, हलवाई सुखपुरा चौक