अब बेसहारा बेटियों को भटकना नहीं पड़ेगा। पांच साल की उम्र से ऊपर की बेटियों के लिए जल्द रोहतक में आशियाना बनकर तैयार होगा। एक करोड़ की लागत से बाल भवन की जमीन पर बनने वाले प्रदेश के पांचवें चिल्ड्रेन होम से बेघर बेटियों को छत मिलने की उम्मीद बंधी है। वहीं इससे पहले जिले में दो एनजीओ की ओर से अनाथ लड़कों और मंदबुद्धि बच्चों के रहने के लिए अनाथालय चल रहे हैं। अब यह जिले का पहला सरकारी आशियाना होगा। हालांकि इसके लिए 2012 में ही सरकार की ओर से बजट पास हो गया था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के चलते 2016 में काम शुरू हो पाया है। उम्मीद जताई जा रही है कि दिवाली तक चिल्ड्रेन होम बनकर तैयार हो जाएगा।
बाल भवन में 172 गुणा साढ़े 48 फुट में चिल्ड्रेन होम बन रहा है। इसमें ग्राउंड फ्लोर के साथ फर्स्ट फ्लोर भी तैयार किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश के चार जिलों में बने चिल्ड्रेन होम में 25 से 30 अनाथ बच्चों की ही रहने की व्यवस्था है, जो काफी कम पड़ती है। इसी के मद्देनजर रोहतक शहर में अब तक का सबसे ज्यादा क्षमता वाला होम बनाया जा रहा है। इस चिल्ड्रेन होम में 50 बच्चे रह सकेंगे। इससे बच्चों को बहादुरगढ़, रेवाड़ी, यमुनानगर या पंचकूला में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे यहीं रहेंगे और उन्हें खाने-पाने के साथ चिकित्सीय सुविधा भी दी जाएगी।
नहीं रहेगी बिजली की दिक्कत
चिल्ड्रेन होम में सोलर सिस्टम भी लगाया जाएगा। साथ ही, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में को ध्यान में रखकर बिल्डिंग तैयार की जा रही है।
यहां हैं चिल्ड्रेन होम
प्रदेश के झज्जर-बहादुरगढ़ के सेक्टर छह में चिल्ड्रेन होम है। जहां अनाथ लड़कियों को आश्रय दिया जाता है। वहीं, रेवाड़ी के आस्था कुंज में बेसहारा लड़कों के लिए रहने की व्यवस्था है। इसके अलावा, यमुनानगर के छिछरौली में अनाथ लड़कों और लड़कियों को आश्रय दिया जाता है। पंचकूला में जो शिशु गृह है, यहां पांच साल तक के बच्चों को रखा जाता है। जिन्हें जरूरतमंद अभिभावकों को गोद दिया जाता है।
होम में होगा ये सब
इस होम में करीब 12 कमरे होंगे। होम की शुरुआत में एक हाल होगा और अंदर एक लाइब्रेरी, चिकित्सीय, एक्टिविटी और जेजेबी (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) भी होगा। इसके अलावा एक चिल्ड्रेन होम अधीक्षक का रेजिडेंट्स भी होगा। साथ ही, आठ बच्चों को एक साथ रखने के लिए एक बड़ा हाल, बरामदा, स्टोर रूम, दो-दो शौचालय भी बनाए जाएंगे।
बच्चे भी दिए जाएंगे गोद
चिल्ड्रेन होम में रहने वाले बच्चों को गोद भी दिया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है। इसमें 50 बच्चाें के रहने-सहने की व्यवस्था की जाएगी। यह जिले का पहला सरकारी चिल्ड्रेन होम होगा। अभी तक अनाथ लड़कों, लड़कियों और मंदबुद्धि बच्चों को जन सेवा संस्थान व लखीराम अनाथालय में रखा जा रहा था।
- सुरेखा हुड्डा, जिला बाल कल्याण परिषद अधिकारी, रोहतक।