हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की एचटेट लेवल-3 परीक्षा के दौरान अधिकतर केंद्रों पर काफी अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। परीक्षार्थियों की चेकिंग के दौरान नियमों में भेदभाव भी देखने को मिला। जहां महिला परीक्षार्थियों को सुहाग की निशानी मंगलसूत्र और चूड़ा उतारना पड़ा, वहीं लड़कों के जूते, मोजे और बेल्ट उतरवाकर चेकिंग की गई। कई केंद्रों पर इतनी सख्ती नहीं की गई।
शनिवार दोपहर एक बजे से ही सभी 40 परीक्षा केेंद्राें पर महिला और पुरुष परीक्षार्थियों की एंट्री होनी शुरू हो गई। इस दौरान ड्यूटी कर्मचारियों ने हर एक की बारीकी से एक-एक चीज की जांच की। लिखित में सुहाग की निशानी उतरवाए जाने का नियम नहीं होने के बावजूद महिला परीक्षार्थियों की बालियां, अंगूठी, कड़े, चूड़ी, हेयर पिन, क्लचर, पायल, मंगलसूत्र, बिछुए, चैन और नॉज पिन उतरवाए गए। कई महिला परीक्षार्थियों ने 15 से 20 वर्षों से नॉज पिन डाली हुई थी। ऐसे में उसे निकालने में उन्हें काफी दर्द से गुजरना पड़ा। यहां तक की उनकी आंखों में आंसू आ गए। लेकिन चेकिंग कर रहे कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा। महिला परीक्षार्थियों से साफ कह दिया गया कि इसके बिना एंट्री नहीं दी जाएगी। जिन महिलाओं ने केवल क्लचर लगाया हुआ था, उन्हें गर्मी में खुले बाल लेकर अंदर जाना पड़ा तो कुछ ने रुमाल से अपने बाल बांधे।
एसपी साहब! प्लीज एंट्री दिला दीजिए
एचटेट लेवल-3 की परीक्षा के दौरान काफी परीक्षार्थी तो देरी की वजह से रह गए। शहर के ज्यादातर केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद देरी से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को एंट्री नहीं दी गई। हालांकि, परीक्षार्थियों ने ड्यूटी कर्मचारियों और मौके पर पहुंचे एसपी शशांक आनंद और डीएसपी पुष्पा खत्री से एंट्री दिलाने के लिए काफी मिन्नतें की, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। इस वजह से काफी परीक्षार्थियों को मायूस लौटना पड़ा। दूसरी ओर, आईसी कॉलेज और शिक्षा भारती स्कूल के बाहर महिला परीक्षार्थियों की लंबी कतार देखने को मिली, जोकि सड़क तक आ गई थी।
सालभर से परीक्षा का इंतजार कर रहे कई परीक्षार्थियों को शनिवार को निराशा मिली। छोटूराम पब्लिक स्कूल में तो दोपहर 1:57 बजे ही एंट्री बंद कर दी गई। इस कारण काफी परीक्षार्थी पेपर देने से वंचित रह गए। कुछ परीक्षार्थी आईडी कार्ड लेने गए थे और तीन मिनट की देरी होने पर परीक्षा नहीं दे पाए। स्कूल प्राचार्या ने भिवानी बोर्ड से आई टीम की अपील को भी नहीं सुना और परीक्षार्थियों को एंट्री करने नहीं दिया। दो बजे के बाद तो दोनों गेटों पर ताला लगा दिया गया।
ढाई घंटे बच्चा भूखा कैसे रहता, इसलिए हो गई लेट
सर छोटूराम पब्लिक स्कूल में एक मिनट देरी से पहुंची महम की भारती ने प्राचार्या और ड्यूटी कर्मचारियों से काफी मिन्नतें की, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। उन्होंने कहा कि उनका बच्चा छोटा है। वह ढाई घंटे कैसे भूखा रहता, इसलिए उसे दूध पिला रही थी। प्लीज, एंट्री करने दीजिए। रोहतक की रश्मि ने बताया कि वे आईडी कार्ड लेने गई थी, इसलिए तीन मिनट लेट हो गई।
जाम ने कराया लेट
शिवम एक्लेव निवासी प्रमोद ने बताया कि शहर में जाम बहुत था। फिर भी वह दो मिनट पहले केंद्र पर पहुंच गए थे लेकिन उन्हें एंट्री नहीं दी गई। जबकि एडमिट कार्ड में एंट्री का समय दो बजे लिखा है। खरावड़ निवासी सोमेश और भाली के भूपेंद्र ने बताया कि जाम में फंसने की वजह से वे 2:05 पर पहुंचे, लेकिन उन्हें एंट्री नहीं दी गई।
एंट्री नहीं मिली तो निराश बैठ गए
बहादुरगढ़ से एक युवक जब तय समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंचा तो सिर पकड़कर मायूस होकर बैठ गया। वह काफी देर तक सेंटर के बाहर बैठा रहा और किसी से बातचीत नहीं की। जिस एडमिट कार्ड से पेपर देना चाहता था, सपने टूटने पर उसी पर बैठ गया।
सत्यापित कराने गया था, हो गया लेट
फरीदाबाद से पेपर देने आए अनिल राठी ने बताया कि देशभर में दस्तावेजों को स्वयं सत्यापित करने का नियम है। लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। वह पीजीआई में एडमिट कार्ड पर लगे फोटो को सत्यापित कराने के लिए गए। इस दौरान तय समय से चार मिनट देरी से पहुंचे। उन्होंने पुलिस कर्मियों और स्कूल स्टाफ से काफी मिन्नतें की, लेकिन एंट्री नहीं मिली।
मां पेपर दे रही थीं तो पिता ने की मासूमों की देखभाल
रोहतक। एचटेट लेवल-3 की परीक्षा के दौरान जब मां पेपर देने के लिए परीक्षा केंद्र में चली गई तो कई पिता बच्चों की देखभाल करते नजर आए। फादर्स डे से एक दिन पहले उनकी यह भूमिका देखकर कइयों ने सराहना की। दरअसल, परीक्षा देने के लिए काफी संख्या में महिलाएं छोटे बच्चों को साथ लेकर आई थीं। ऐसे में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी पिता और दादी-नानी को निभानी पड़ी। दोपहर दो बजे से शाम 4:30 बजे तक हुई परीक्षा के दौरान कई पिता बच्चों को लेकर केंद्र के आसपास बैठे रहे। कुछ अपनी गाड़ी में बच्चों को संभालते नजर आए।