बीएएमएस (बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री मिलने के 5 साल बाद प्रदेश के 180 आयुर्वेदिक चिकित्सकों की डिग्री अमान्य घोषित कर दी गई हैं। प्रदेश के तीन आयुर्वेदिक कॉलेजों का पंजीकरण रद्द होने से इन डिग्रीधारकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
इस संबंध में हरियाणा भारतीय चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार का पत्र मिलने पर बीएएमएस डॉक्टरों के होश उड़े हुए हैं। इस मामले को लेकर कुछ डॉक्टरों ने शुक्रवार को बाबा मस्तनाथ विवि के कुलपति से मुलाकात कर अपनी डिग्री बचाने की गुहार लगाई। इसके लिए वे धरना देने की जिद पर अड़े तो उन्हें समझाकर घर भेज दिया गया।
भारतीय चिकित्सा परिषद पंचकूला के रजिस्ट्रार ने एक पत्र जारी किया है। इसमें प्रदेश के तीन आयुर्वेदिक कॉलेजों के वर्ष 2011 बैच के बीएएमएस डाॅक्टरों की डिग्री अमान्य होने की बात कही गई है। बीएएमएस डिग्री धारकों को मिले पत्रों में साफ लिखा है कि वर्ष 2011 में मुरारी लाल रासिवासिया आयुर्वेदिक कॉलेज चरखी दादरी, बाबा मस्तनाथ आयुर्वेदिक कॉलेज अस्थल बोहर, श्रीकृष्णा गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल उमरी रोड कुरुक्षेत्र भारतीय केंद्रीय चिकित्सा परिषद के अधिनियम 1970 की द्वितीय अनुसूची (मानक के अनरूप सुविधाएं )में शामिल नहीं थे। इसलिए इन कॉलेजों में इस वर्ष प्रविष्टि प्राप्त छात्रों की उपाधि मान्य नहीं हैं। इन उपाधि धारकों का पंजीकरण नहीं किया जा सकता था।
परिषद ने उम्मीदवारों को पंजीकृत करते हुए पंजीकरण प्रमाण पत्र भेज दिए थे। संबंधित कॉलेजों को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर सचेत किया गया था। पत्र में कहा गया था कि यदि वर्ष 2011 में आपका कॉलेज भारतीय केंद्रीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1970 की द्वितीय अनुसूची में सम्मलित नहीं है तो एक सप्ताह में अपने कॉलेज को अनुसूची में सम्मलित कराते हुए परिषद को सूचित करें।
इसके बावजूद भारतीय केंद्रीय चिकित्सक परिषद या कॉलेज की ओर से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए आपका पंजीकरण रद्द किया जाता है। आप दस दिन में मूल पंजीकरण प्रमाण पत्र व पहचान पत्र कार्यालय में भिजवाना सुनिश्चित करें।
बीएएमएस डॉक्टरों ने आयुष मंत्री को भेजा पत्र
बाबा मस्तनाथ आयुर्वेदिक कॉलेज से बीएएमएस करने वाले उम्मीदवारों ने अपनी डिग्री अमान्य होने से बचाने के लिए आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि हम बाबा मस्तनाथ आयुर्वेदिक कॉलेज के 2011 बैच के छात्र हैं। हमें आयुर्वेदिक डिग्री मिले पांच वर्ष हो चुके हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा में पंजीकरण भी हो चुका है। वीरवार को हरियाणा भारतीय चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार का पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें हमारा पंजीकरण रद्द किये जाने की बात कही गई है। डिग्री अमान्य कर दी गई है। इससे हमारा भविष्य बर्बाद हो जाएगा। डिग्री करने के बाद कुछ नौकरी कर रहे हैं तो कुछ निजी प्रैक्टिस। ऐसे में हमारी समस्या गंभीर बन गई है। इसका समाधान किया जाए।
बीएएमएस 2011 बैच के कुछ पूर्व विद्यार्थी मिलने आए थे। परिषद से डिग्री अमान्य किए जाने का पत्र प्राप्त होने के बाद वे समाधान के लिए आए थे। उनकी हर संभव मदद की जाएगी। संस्थान की किसी तरह की कोई गलती नहीं है। उस समय परीक्षा पीजीआई लेता था। परिणाम के डिग्री जारी होने पर मुख्यालय में पंजीकरण हो गया। इसके बाद किसी तरह की दिक्कत को लेकर कोई रिमाइंडर नहीं आया। विद्यार्थियों के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। पॉलिसी के तहत विद्यार्थियों के हक में ही समाधान कराया जाएगा। - डॉ. रमेश कुमार, कुलपति, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय।