रोडवेज की 19 बसों के पहिए जाम
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रोडवेज में प्राइवेट बसों को परमिट देने से संबंधित नया नियम सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच फिर से तकरार पैदा कर रहा है। प्राइवेट बसों को दिए जाने वाले परमिट के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। इसके लिए प्रदेश भर से कर्मचारी 9 मई को सचिवालय चंडीगढ़ में प्रदर्शन के लिए कूच करेंगे।
परिवहन आयुक्त एसएस ढिल्लो की ओर से कोर्ट में दिए हलफनामे से प्रदेश के सभी कर्मचारी यूनियन नाखुश हैं। ढिल्लो ने 20 अप्रैल को कोर्ट में फैसले को लेकर संशोधन की बात कही है। जबकि तमाम यूनियन के सदस्य इसे निरस्त कराने पर अड़े हैं। सर्व कर्मचारी संघ के डिपो सचिव जयकंवार दहिया ने बताया कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है। सरकार ने 13 अप्रैल को फैसला वापस लेने की बात कहते हुए हड़ताल खत्म करवाई थी।
लेकिन परिवहन आयुक्त के हलफनामे से साबित हो गया है कि सरकार प्राइवेट बसों के परमिट देने के फैसले में मामूली बदलाव के अलावा कुछ नहीं करने वाली। इसीलिए सर्व कर्मचारी संघ, रोडवेज कर्मचारी यूनियन संबंधित महासंघ के अलावा प्रदेश के सभी कर्मचारी संगठनों के सदस्य सचिवालय चंडीगढ़ का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो संपूर्ण प्रदेश में दोबारा चक्का जाम करेंगे।
सरकार का यह फैसला आमजन के हित में नहीं है। प्राइवेट गाड़ियां लोगों को वे सुविधाएं और सहूलियत कभी नहीं दे सकतीं जो रोडवेज बसें देती रही हैं। यह फैसला भविष्य में युवाओं की रोजगार की समस्याओं को और बढ़ा देगा। सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। इसके अलावा जिन कर्मचारियों पर केस दर्ज हुए हैं या वेतन काटा गया है, उसे निरस्त किया जाए।
- कृष्ण कुमार, परिचालक।
हम यह आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। रोडवेज में पहले ही बसों की कमी है। सरकार इन्हें बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं कर रही है। प्राइवेट बसों के संचालक कभी भी लोकहित में काम नहीं करेंगे। उन्हें सिर्फ अपना मुनाफा ही दिखेगा। इससे सीधे तौर पर आम जनता का नुकसान ही होगा। इस फैसले को वापस लेकर रोडवेज के बेड़े में बसों का इजाफा होना चाहिए।
- सतबीर मुढ़ाल, डिपो प्रधान, सर्व कर्मचारी संघ।