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Rohtak News: इंग्लिश विषय में रीडिंग, राइटिंग और लिटरेचर को बराबर महत्व देकर करें परीक्षा की तैयारी

Sun, 18 Jan 2026 02:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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07...सीमा खटकड़, पीजीटी इंग्लिश, श्री बाबा मस्तनाथ पब्लिक स्कूल रोहतक।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को सबसे पहले इंग्लिश विषय के तीनों सेक्शन रीडिंग, राइटिंग और लिटरेचर को बराबर महत्व देकर तैयारी करें। किसी एक सेक्शन को नजरअंदाज करना नुकसानदेह हो सकता है। रीडिंग सेक्शन में पैसेज को ध्यान से पढ़ें। पहले प्रश्न पढ़ें, फिर पैसेज पढ़ें व उत्तर सीधे उसी से ढूंढें। अनुमान से जवाब न लिखें। यह सुझाव दिया है बाबा मस्तनाथ पब्लिक स्कूल की पीजीटी इंग्लिश शिक्षिका सीमा खटकड़ का।

अंग्रेजी विषय में 17 साल का अनुभव रखने वालीं सीमा खटकड़ कहती हैं कि सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले सैंपल पेपर्स के अच्छे सॉल्यूशंस पढ़ें, फिर खुद से उत्तर लिखकर अभ्यास करें। इससे भाषा और प्रस्तुति दोनों सुधरती हैं।
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लिटरेचर सेक्शन में लंबे उत्तरों को पैराग्राफ में बांटकर लिखें, पाॅइंट्स में नहीं। पहले पैराग्राफ में उत्तर का परिचय, दूसरे में मुख्य कंटेंट, तीसरे में निष्कर्ष या संदेश लिखें। साथ ही, उत्तर में कहानी या पाठ से जुड़े की-वर्ड्स और सही संदर्भ जरूर शामिल करें।

नियमित रूप से रिवीजन और लिखने का अभ्यास करें, क्योंकि इंग्लिश एक लिखने वाला विषय है, सिर्फ पढ़ने से नहीं आता।



वोकैबलरी वाले प्रश्नों के लिए रोज 5-10 नए शब्द याद करें
सीमा खटकड़ का कहना है कि रोज 1-2 अपठित गद्यांश हल करें। पहले प्रश्न पढ़ें, फिर पैसेज पढ़ें, उत्तर सीधे और संक्षेप में लिखें। वोकैबलरी वाले प्रश्नों के लिए रोज 5 से 10 नए शब्द याद करें। लिटरेचर (फ्लेमिंगो एंड विस्टास) की सही स्ट्रेटेजी में हर चैप्टर के लिए समरी, थीम, मुख्य पात्र व इंपोर्टेंट प्रश्न-उत्तर अपने शब्दों में लिखें। एनसीईआरटी की लाइन्स और घटनाओं पर ज्यादा ध्यान दें। बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न जरूर याद करें। पिछले 5 से 10 वर्षों तक के प्रश्न पत्र हल करें। राइटिंग सेक्शन में हमेशा फॉर्मेट, स्पेलिंग और कंटेंट का पूरा ध्यान रखें। चाहे पत्र हो, लेख हो या रिपोर्ट, सही फॉर्मेट के बिना पूरे अंक नहीं मिलते।
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डाइटीशियन टिप्स

परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को स्वास्थ्य व आहार पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस समय बच्चों को खाने में प्रोटीन मिलेगा तो उनका पोषण भी होगा। अभिभावकों को बच्चों को खाने में अनाज, दाल, सब्जी व दही देना चाहिए। अगर स्नैक्स ले रहे हैं तो वो हेल्दी ही हों। बच्चों को फ्रूट सलाद बनाकर दे सकते हैं। सर्दियों में मूंगफली व बेसन के लड्डू दूध के साथ दें। बच्चों का प्रॉपर डाइट बैलेंस बनाना चाहिए। 6 से 15 साल तक के बच्चे टाइम अनुसार दो-दो रोटी लें। साथ में दाल या सब्जी भी हो। इससे ऊपर के आयु वाले लड़के तीन रोटियां, सब्जी व दही आदि का सेवन करें। लड़कियां अपने आहार में दो रोटियां व सब्जी-दही को शामिल करें। मोटे अनाज की रोटियां बनाएं। सलाद का अधिक-अधिक सेवन करें। जूस व दूध अनिवार्य रूप से पिलाएं।

- डॉ. पूनम कथूरिया, वरिष्ठ डाइटीशियन

07...सीमा खटकड़, पीजीटी इंग्लिश, श्री बाबा मस्तनाथ पब्लिक स्कूल रोहतक।

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