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विजय नगर हत्याकांड में पुलिस ने बरती लापरवाही : रेणू

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36-पत्रकारों से बात करते एडवोकेट डॉ. दीपक भारद्वाज व अन्य। संवाद - फोटो : अ​धिवक्ता संघ द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में मौजूद विधायक श्रावस्ती रामफेरन पांडेय व अन्य।
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माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। अमन वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्ष रेणु कुमारी और अधिवक्ता दीपक भारद्वाज ने पुलिस पर आरोप लगाए हैं कि विजय नगर हत्याकांड में जांच एजेंसी ने साक्ष्यों के प्रति गंभीर लापरवाही बरती है। परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में पांचवें सदस्य को ही आरोपी बना दिया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण तक में गंभीरता नहीं दिखाई। इस बारे में दो निजी संचार कंपनियों के अधिकारियों ने अदालत में स्वीकारा है कि पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन या अन्य किसी तरह की जानकारी मांगी ही नहीं।
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इसके अलावा परिवार की तीसरे सदस्य को बगैर किसी सूचना के दिल्ली ले जाना। वहां उनकी मौत होने के बाद किसी तरह के साक्ष्य न जुटाना भी पुलिस की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। आरोपी पक्ष ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय के समक्ष आवेदन कर जांच एजेंसियों की ओर से न्यायालय के आदेशों की कथित अवहेलना व महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखने का गंभीर मुद्दा उठाया है।
आवेदन में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। कथित कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट उपयोग डेटा, संदेश लॉग, सीसीटीवी फुटेज व अन्य डिजिटल साक्ष्य सत्य का पता लगाने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण थे।

न्यायालय ने तीन मार्च 2022 व 29 नवंबर 2022 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल टॉवर लोकेशन रिकॉर्ड, इंटरनेट डेटा व अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके बावजूद जांच एजेंसियों एवं संबंधित अधिकारियों ने इन आदेशों का पालन नहीं किया।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुकदमे के दौरान दूरसंचार कंपनियों के नोडल अधिकारियों की गवाही से यह तथ्य सामने आया कि उन्हें न्यायालय के उक्त आदेशों के अनुपालन के लिए कोई प्रभावी संचार प्राप्त नहीं हुआ। वह यह भी पुष्टि नहीं कर पाए कि संबंधित डेटा कभी सुरक्षित रखा गया था या नहीं।

आरोपी पक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते आवश्यक संरक्षण कार्रवाई की जाती तो मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड, इंटरनेट उपयोग डेटा, होटल के प्रवेश एवं पार्किंग क्षेत्र की सीसीटीवी फुटेज व अन्य डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध होते। यह मामले की वास्तविक परिस्थितियों को उजागर करने में सहायक हो सकते थे।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण में कथित विफलता से महत्वपूर्ण साक्ष्य स्थायी रूप से नष्ट हो गए। इससे आरोपी को अपनी बेगुनाही सिद्ध करने के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण सामग्री से वंचित होना पड़ रहा है। आरोपी पक्ष ने यह आशंका व्यक्त की है कि यह केवल साधारण लापरवाही नहीं बल्कि तथ्यों को छिपाने व न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है।
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वर्जन
विजय नगर हत्याकांड में पुलिस तीन महीने में चालान अदालत में पेश कर चुकी है। केस अदालत में विचाराधीन है इसलिए इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। - इंस्पेक्टर राकेश कुमार, प्रभारी, शिवाजी कॉलोनी थाना।
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