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कैंसर प्रभावित फेफड़े के टुकड़े को निकाल कर बनाया पीजीआईएमएस ने रिकॉर्ड

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रोहतक। पीजीआईएमएस ने चिकित्सा क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाते हुए फेफड़े के कैंसर प्रभावित हिस्से को निकाल कर मरीज को नया जीवन दिया है। यह संस्थान का पहला ऐसा केस है, जोकि नए डॉक्टरों के सीखने के लिए है। मरीज को शनिवार को छुट्टी दे दी गई है, उसकी हालात में सुधार है। यह जानकारी पीजीआईएमएस के पल्मनरी एंड क्रिटीकल केयर मेडिसन (पीसीसीएम) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार ने बीमारी व इसके इलाज की जानकारी साझा करते हुए वर्कशॉप में दी।
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शनिवार को पीसीसीएम की ओर से संस्थान के डेंटल कॉलेज सभागार में छठी वार्षिक कांफ्रेंस आयोजित की गई। यहां सीएमई के चेयरमैन एवं पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी की देखरेख में प्रदेश के चिकित्सकों व चिकित्सा विद्यार्थियों श्वांस संबंधी रोगों में प्रयोग होने वाले उपकरणों का बेहतर उपयोग करते हुए मरीज को सही इलाज देने का प्रशिक्षण दिया। यहीं फेफड़े के रोगों के विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। इसमें डॉ. पवन कुमार ने बताया कि बीड़ी-हुक्का व प्रदूषण लोगों को फेफड़े के कैंसर का रोगी बना रहे हैं। पीजीआईएमएस में हर वर्ष ऐसे औसतन 700 मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत तीसरी व चौथी स्टेज पर इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिन्हें बचाना मुश्किल होता है। देश में कैंसर से होने वाली कुल मौतों का 40 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर का है। इसका इलाज संभव है, बशर्ते मर्ज की समय रहते पहचान व इलाज हो। लेकिन हैरानी है कि देश में फेफड़े के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मरीजों की मौत भी हो रही है। इसकी बड़ी वजह आमतौर पर खांसी या श्वांस संबंधी दिक्कतों को गंभीरता से न लेना व बीमारी की देर से पहचान होना है। फेफड़े के कैंसर से पीड़ित 90 प्रतिशत मरीज तीसरी या चौथी स्टेज पर इलाज के लिए पहुंचते हैं। पीजीआई के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां हर वर्ष ऐसे औसतन 700 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत अंतिम चरण में होते हैं। ऐसे मरीजों को राहत देने के लिए पीसीसीएम की प्रत्येक सोमवार, वीरवार व शनिवार को ओपीडी लगती है। यहां हर ओपीडी के दिन करीब दस केस आते हैं। इनमें से पांच नए मरीज होते हैं।
जागरूकता के लिए तैयार की बुकलेट
फेफड़े के कैंसर पीड़ित ज्यादा जिंदा नहीं रह पाते क्योंकि इनकी सर्जरी कम हो पाती है। जानकारी के अभाव में खतरा बढ़ रहा है। इसके लिए एक इंफॉर्मेशन बुकलेट तैयार की गई है। पीजीआईएमआर के डॉ. नवनीत सिंह के साथ मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रविवार को सीएमई में स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति प्रो. अनीता सक्सेना व क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के अध्यक्ष डॉ. विवेक कौशल इसका लोकार्पण करेंगे।
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संस्थान ने बनाया रिकॉर्ड
पीसीसीएम विभाग में शनिवार को फेफड़े के कैंसर से पीड़ित मरीज छुट्टी दे दी गई। यह पहला मरीज है जोकि ऑपरेशन के बाद ठीक है। चिकित्सकों का कहना है कि फेफड़े के कैंसर का इलाज इम्यूकोथैरेपी व जैनेटिक ड्रग्स से किया जा रहा है। इसी के चलते 50 वर्षीय मरीज को छुट्टी दी गई है। इसे पूर्व दूसरी स्टेज में इलाज के लिए मरीज को कीमोथैरेपी दी गई ताकि कैंसर प्रभावित क्षेत्र को कम किया जा सके। यह ऑपरेशन डॉ. संजीव प्रसाद व डॉ. सुनील ने किया है।
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