पं. बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को अचानक बिना एजेंडे के एसी की बैठक बुलाई गई। बिना किसी सूचना के बुलाई गई शैक्षणिक काउंसिल की बैठक को लेकर विभागाध्यक्षों ने सवाल खड़े कर दिए। सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विभागाध्यक्षों ने जमकर हंगामा खड़ा किया। उनका कहना था कि बैठक बुलाई जानी तो समय दिया जाता। ऐसे में उनके पास एजेंडे की फाइल ही नहीं है तो बैठक में वह क्या करें? काफी देर तक हंगामे के बाद 17 एजेंडे को पास कर दिया गया। हालांकि इस दौरान कुलपति भी यह कहने से नहीं चूके कि संस्थान में तो उनको भी नहीं छोड़ा गया।
करीब सुबह 10 बजे पीजीआईएमएस के कुछ विभागाध्यक्षों की टेबल पर बिना एजेंडे के एसी की बैठक का बुलावा पहुंचा। वरिष्ठ डॉक्टरों को हैरानी थी आखिर बगैर एजेंडा वह अपनी बात क्या रखेंगे। इसके लिए कम से कम एक सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए थे। यही नहीं बैठक में भी विभागाध्यक्षों को एजेंडे की फाइल नहीं मिली। इससे खफा कई विभागाध्यक्ष तो बैठक में शामिल ही नहीं हुए। जो गए उन्होंने बैठक को लेकर सवाल खड़ा कर दिया कि, क्या उन्हें सिर्फ सहमति जताने के लिए बुलाया गया? इसके बावजूद कुलपति डॉ. ओपी कालरा खामोश रहे। वहीं बैठक में दीक्षांत समारोह को लेकर एजेंडा पास किया गया। किसी दीक्षांत समारोह में यह पहली बार होगा जब ड्रेस कोड बदला-बदला सा होगा। दीक्षांत समारोह में पुरुष स्टाफ सफेद पेंट-शर्ट, काली बेल्ट और काले जूते में होंगे। जबकि महिला स्टाफ सफेद साड़ी में होंगी।
हंगामे के बीच उठे कई सवाल
सुबह 11 बजे से डेढ़ बजे तक तो छिटपुट बहस के बीच एजेंडे पास होते रहे। एजेंडे पास होने के बाद बैठक में हंगामा खड़ा हो गया। एक विभागाध्यक्ष ने आरटीआई की झूठी शिकायत, बगैर शिकायतकर्ता के टारगेट बना कर जांच करना, सीआईडी को जांच सौंपे जाने की सिफारिश करना जैसे मुद्दे उठाए। बैठक में उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ शारीरिक शोषण किए जाने के आरोप जड़ने तक की साजिश रची गई। इसकी रिकॉर्डिंग वे कुलपति को उपलब्ध करवा देंगे। इसके बाद एक अन्य विभागाध्यक्ष ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि संस्थान में जानबूझ कर परेशान किया जाता है। एक अधिकारी के खिलाफ लगाई गई आरटीआई के सवालों पर भी जमकर व्यंग्य कसे गए। बात बढ़ी तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने टोका और चेतावनी दी। इस पर विभागाध्यक्ष और भड़क गए, उन्होंने यहां तक कह दिया कि वे तो संस्थान में 2035 तक हैं, बाकी लोग अपनी चिंता कर लें। इसी बीच सहायक विजिलेंस जांच अधिकारी पर भी सवाल उठाया गया कि जब यह पद ही नहीं है तो इस नाम पर जांच कैसे की जाती है। कुछ अधिकारी इस पद के नाम की आड़ में फर्जी शिकायत पर फर्जी जांच गठित करते हैं। हैरानी तो उस समय हुई जब संस्थान के एक अधिकारी ने एक विभागाध्यक्ष को शांत करने के लिए यहां तक कह दिया कि वे खुद आरटीआई को झेल रहे हैं। इसके माध्यम से उनके चालक, गाड़ी की रनिंग और खर्चें तक का ब्यौरा मांगा जाता है।
ये है एसी की बैठक बुलाने का नियम
शैक्षणिक काउंसिल की बैठक में रखे जाने वाले एजेंडा एक सप्ताह से 10 दिन पहले विभागाध्यक्षों को दिया जाना होता है। जिससे वे पढ़ कर अपनी राय दे सकें। एसी की बैठक में एजेंडों को हरी झंडी मिलने के बाद एग्जीक्यूटिव काउंसिल में रखा जाता है। इसमें पास होने पर ही पास हुए एजेंडा को अंतिम रूप के लिए सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है।
इन्हें मिली हरी झंडी
- फरीदाबाद स्थित गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद।
- पोस्ट सेक्शन आपरेशन थियेटर और उसके स्टाफ को हरी झंडी।
- गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की आयु 62 से 65 वर्ष करना।
- स्टाफ नर्स शैक्षणिक की आयु 62 से 65 करना।
- आपातकालीन विभाग का अलग मेडिसन विभाग शुरू करना।
- नेफ्रोलॉजी विभाग में डीएम शुरू करना।
- दीक्षांत समारोह में एमबीबीएस, एमडी, एमसीएच वालों को डिग्री देना।
- यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार हर साल दीक्षांत समारोह का आयोजन।
- दीक्षांत समारोह में पुरुष स्टाफ सफेद पेंट-शर्ट, काली बेल्ट और काले जूते में होंगे।
- दीक्षांत समारोह में महिला स्टाफ सफेद साड़ी में होंगी।