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रसोई से आउट प्याज ने लगाया 'शतक'

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आम आदमी की थाली पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। पिछले कई दिनों से सब्जियों में खासकर प्याज कीमतें बढ़ती जा रही है। रसोई से बाहर होने के साथ ही प्याज के भाव 100 रुपये से पार पहुंच गए हैं। प्याज के आढ़तियों का कहना है कि महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश से फसल बर्बाद होने से आवक कम हो गई है। सब्जी आढ़ती संघ के बिजेंद्र छाबड़ा का कहना है कि राजस्थान और लोकल प्याज की आवक बढ़ने के बाद ही यह सस्ता होगा। फिलहाल अगले दस दिनों तक प्याज की आवक बढ़ने और भाव कम होने की कोई उम्मीद नहीं है।
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शहर की मंडी में हर रोज बीस हजार क्विंटल प्याज की खपत है। वीरवार को प्याज का थोक भाव 80 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि रिटेल में यही प्याज 100 रुपये से लेकर 120 रुपये तक में बिका। प्याज की बढ़ती कीमतों के कारण शहर में रोजाना 20 हजार क्विंटल खपत से केवल दस हजार क्विंटल खपत रह गई है। उधर, प्याज की कालाबाजारी को रोकने के लिए फूड सप्लाई कंट्रोल और मार्केट कमेटी के सचिव की संयुक्त टीम छापेमारी कर रही है। हालांकि अभी तक कहीं भी नियम विरुद्घ ढंग से एकत्र किया प्याज नहीं मिला है। वहीं, फूड सप्लाई कंट्रोल की ओर से बीपीएल परिवार को सस्ता प्याज देने का दावा किया था, लेकिन अभी तक सरकारी प्याज की खेप राशन डिपो पर नहीं पहुंची है। जिला फूड सप्लाई कंट्रोल अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सप्लाई मिलते ही उपभोक्ताओं को कम कीमत में प्याज दिया जाएगा।
ये है प्याज का स्टॉक रखने का नियम
थोक में 500 क्विंटल तक व खुदरा में 100 क्विंटल तक ही व्यापारी प्याज का स्टॉक अपने पास रख सकते हैं। प्याज की कीमतों में बेतहाशा वृद्घि होने से प्याज के अधिक स्टॉक से इसकी कीमतों में और इजाफा होने की आशंका है। यही वजह है कि फूड सप्लाई कंट्रोल की ओर से कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी की जा रही है।
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रेट बढ़ने से प्याज की डिमांड 90 प्रतिशत घटी
रेट बढ़ने से शहर में प्याज की डिमांड 100 से घटकर केवल 10 प्रतिशत पर आ गई है, क्योंकि बाजार में प्याज की बिक्री 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम हो रही है। ऐसे में अधिकतर लोगों ने प्याज खरीदना ही बंद कर दिया है।
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