रोहतक। एमडीयू के इंटीग्रेटेड कोर्सों की कोर्ट के पेंच में फंसी दाखिला प्रक्रिया अब सुलझने लगी है। मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिविजन आशीष कुमार की अदालत ने एनएसएस वैटेज के लिए लगाई गई दो छात्राओं की अर्जी को खारिज कर दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब तीन नवंबर को होगी।
अदालत में मंगलवार को एमएससी-गणित पंचवर्षीय समेकित गणित आनर्स पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधित प्रीति बनाम एमडीयू का मामला सुनवाई के लिए रखा गया। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आशीष कुमार शर्मा ने वादी प्रीति की याचिका की सुनवाई करते हुए इसे खारिज कर दिया। इसके लिए एनएनएस की वैटेज किसी को नहीं दिए जाने का हवाला दिया गया है। इसी अदालत में एमए अंग्रेजी पंच वर्षीय समेकित पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधित आरती बनाम एमडीयू के मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने वादी की याचिका को खारिज कर दिया। दोनों ही मामलों में वादी ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के वैटेज को मेरिट के लिए जोड़े जाने की प्रार्थना की थी। अदालत ने विश्वविद्यालय की दलील को स्वीकार किया कि स्कूल स्तर पर जारी किए गए एनएसएस सर्टिफिकेट को एनएसएस वैटेज के लिए स्वीकृत नहीं किया जा सकता है।
बता दें कि विवि के सभी स्नातकीय आनर्स समेकित पाठ्यक्रमों में एनएसएस वैटेज को स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। क्योंकि ये प्रमाण पत्र राज्य स्तरीय/यूनिवर्सिटी स्तरीय एनएसएस मेरिट सर्टिफिकेट के समतुल्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे लड़ाई
इनसो प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप देशवाल का कहना है कि अदालत के ऑर्डर की प्रति पढ़ी नहीं है। इसे पढ़ने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। यदि फैसला विद्यार्थी हित में नहीं हुआ तो न्याय के लिए ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी। छात्र हित की लड़ाई संगठन नि:शुल्क लड़ेगा।