रोहतक। नागरिक अस्पताल में अब कुत्तों और बंदरों के काटने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी में 24 घंटे एंटी-रेबीज टीका लगाने की व्यवस्था की गई है। यह टीका बंदर और कुत्ता काट ले तो 72 घंटे के भीतर पीड़ित मरीज को लगाना आवश्यक होता है। रेबीज एक घातक बीमारी है जो एक वायरस के कारण होती है। डाॅग बाइट के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह व्यवस्था शुरू की है। एंटी रेबीज टीका आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों के लिए मुफ्त है। वहीं, यह कार्ड न होने पर 100 रुपये प्रति इंजेक्शन शुल्क मरीज को देना होता है जबकि निजी अस्पतालों में यह टीका 400 से 450 रुपये तक लगाया जाता है।
इस नई व्यवस्था से पहले नागरिक अस्पताल में कुत्ते, बंदर के काटने से घायल मरीजों को ओपीडी के समय ही एंटी रेबीज टीका लगाने के लिए आना पड़ता था जो सुबह 8 से दो बजे तक ही है। इसके बाद अगर एंटी रेबीज की जरूरत वाला कोई मरीज आता तो उसे पीजीआई भेज दिया जाता था।
डाॅग बाइट के बाद 72 घंटे में इंजेक्शन जरूरी
डॉग बाइट के मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एंटी रेबीज टीका लगवाना चाहिए। अगर 72 घंटे कें अंदर एंटी रेबीज का टीका पीड़ित लेने में चूक जाता है तो रेबीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित होने के बाद पीड़ित को बचाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि रेबीज एक लाइलाज बीमारी है। अक्सर कुत्ते या बंदर के काटने पर लोग एंटी रेबीज (पैसिव) टीका लगवाकर समझते हैं इलाज पूरा गया। जबकि ऐसा नहीं है। अगर कुत्ते या बंदर के काटने पर घाव अधिक गहरा है तो पीड़ित को एक्टिव टीका भी लगवाना जरूरी है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेकर ही टीके का कोर्स पूरा करें।
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कुत्ते के काटने पर 72 घंटे तक टीका लगवाना होता है। लेकिन मरीज भीड़ को देखकर टीका नहीं लगवाने आते हैं। इसलिए विभाग की ओर से 24 घंटे एंटी रेबीज टीके लगाने की सुविधा शुरू की गई है।
-डॉ. रेनु भांबू, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।