नगर निगम चालू वित्त वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स वसूली का टारगेट हासिल नहीं कर पा रहा है। लक्ष्य हासिल करने के लिए 300 के करीब प्रॉपर्टी टैक्स के बकायेदारों को नोटिस भेजा गया है, क्योंकि नौ माह में नगर निगम केवल 22 करोड़ रुपये ही जमा कर सका है। लक्ष्य 31 मार्च तक 35 करोड़ रुपये का है। वीरवार को निगम आयुक्त ने अधिकारियों के साथ टैक्स रिकवरी को लेकर बैठक में समीक्षा की और सीलिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए।
नगर निगम ने साल 2024-25 के बजट में प्रॉपर्टी टैक्स वसूली का टारगेट 35 करोड़ रुपये रखा था, लेकिन निगम उसे हासिल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, क्योंकि तीन साल से शहर के लोग प्रॉपर्टी आईडी में मिल रही त्रुटियों से परेशान हैं। इस कारण टैक्स भी जमा नहीं हो रहा है। चुनावी साल में रिकवरी बढ़ाने के लिए सरकार ने 30 सितंबर तक बकाया पर पूर्ण ब्याज माफी व चालू वित्त वर्ष के टैक्स को स्वयं प्रमाणित करने पर 15 प्रतिशत की छूट दे रखी थी। इसके बावजूद लोग टैक्स जमा नहीं करवा सके, क्योंकि सर्वे कंपनी ने प्रॉपर्टी टैक्स के रिकाॅर्ड में व्यापक त्रुटियां छोड़ दीं। इससे लोगों की प्रॉपर्टी आईडी में गड़बड़ी हो गई। कहीं मोबाइल नंबर गलत तो कहीं नाम व क्षेत्र गलत कर दिया गया। नगर निगम लगातार तीसरे साल प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में पीछे चल रहा है। 2022-23 में 55 करोड़ का टारगेट रखा था, लेकिन निगम 36 करोड़ रुपये की रिकवरी ही कर सका। 2023-24 में 36 करोड़ का टारगेट रखा, लेकिन 26 करोड़ ही वसूली हो सकी। अब 35 करोड़ का टारगेट रखा है, लेकिन वसूली 22 करोड़ के करीब ही पहुंची है।
प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी बढ़ाने के लिए अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी है। बड़े बकायेदारों को नोटिस भेजे गए हैं। टैक्स जमा न करवाने वालों के खिलाफ सिलिंग अभियान चलाएंगे।
- धर्मेंद्र सिंह, आयुक्त नगर निगम।