कोरोना वायरस के महामारी का रूप लेने के बावजूद विद्यार्थियों का पठन पाठन कार्य सुचारु है। जिले के विभिन्न निजी स्कूलों ने मंगलवार को अपना परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। यह पहली बार कि स्कूलों ने परीक्षा परिणाम सोशल मीडिया के जरिये सार्वजनिक किया है। अभिभावकों के मोबाइल पर भी बच्चों का रिपोर्ट कार्ड भेजा गया है।
सरकारी स्कूल भले नए सत्र को लेकर अभी लॉकडाउन हटाने के इंतजार में हैं, मगर निजी स्कूलों ने बुधवार से नया सत्र शुरू करने का फैसला कर लिया है। मंगलवार को स्कूलों ने परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। पहली बार यह परिणाम व्हाट्सअप व अभिभावकों के मोबाइल पर भेजा गया है। अपना परिणाम जानने के बाद नई कक्षा में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे। विद्यार्थी बुधवार से नई कक्षा की पढ़ाई शुरू करेंगे। वे घर रह ही स्कूल खुलने तक अध्ययन करेंगे। इसके लिए कुछ स्कूलों ने एप तैयार किए हैं तो कुछ ने नोट्स, वीडियो व ब्रॉडकास्ट की तैयारी की है। इससे वे समय पर अपना सिलेबस पूरा कर पाएंगे। बच्चों को सोशल मीडिया या ऑनलाइन लर्निंग मैटीरियल मुहैया कराया जाएगा। घर रह कर अध्ययन करने वाले विद्यार्थी किसी तरह की समस्या आने पर अपने शिक्षक से मोबाइल पर बात भी कर सकते हैं। शिक्षक ऑनलाइन की विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करेंगे।
बगैर फीस होगा नई कक्षा में प्रवेश
पहली बार विद्यार्थियों को पुरानी से नई कक्षा में बगैर फीस प्रवेश दिया जा रहा है। महामारी के कारण स्कूल विद्यार्थियों पर फीस जमा कराने का दबाव नहीं बनाएगा। यही नहीं नए सत्र में फीस भी नहीं बढ़ाई जाएगी।
सरकारी स्कूल रह जाएंगे पीछे
नए सत्र की शैक्षणिक दौड़ में सरकारी स्कूलों के पीछे रहने की पूरी संभावना बन गई है। महामारी के चलते स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां सत्र या पढ़ाई कब शुरू होगी, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चों का सिलेबस सत्र के अंत तक पूरा भी हो पाएगा, यह अपने आपमें बड़ा सवाल होने के साथ व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से परहेज बरत रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही है, प्राइवेट स्कूलों में हो रही है, यह कहना गलत है। निजी स्कूल ऑनलाइन एप के जरिये पढ़ाई कराएंगे। एप किसी एक के लिए नहीं होता। यह सबका होता है। इस पर दूसरे बच्चे भी पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा घर में माता-पिता, बड़े भाई-बहन भी विद्यार्थियों को पढ़ा सकते हैं।
- परमेश्वरी हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी।