नगर निगम अधिकारी भले ही शहर में विकास कराने का दम भरते हो, लेकिन उनका यह विकास दूसरे सरकारी विभागों की बैसाखी के सहारे चल रहा है।
निगम में विकास से संबंधी सभी विंग मौजूद है, लेकिन उसके बावजूद वह पीडब्ल्यूडी, पंचायतीराज व पब्लिक हेल्थ से विकास काम करा रहा है।
यही कारण है कि 2012 से अभी तक तीनों विभागों से 29 करोड़ से ज्यादा के काम कराये जा चुके हैं। इससे कई नुकसान भी उठाने पड़ रहे हैं और नगर निगम अपने अनुसार काम नहीं करा सकता है तो कई बार घटिया सामग्री तक लगाई जाती है।
नगर निगम शहर में विकास कार्य कराने के लिए सबसे ज्यादा पीडब्ल्यूडी पर निर्भर है और 16 अगस्त 2012 से अभी तक 25 करोड़ 70 लाख 80 हजार रुपये तक के विकास कार्य कराए गए।
पब्लिक हेल्थ से नगर निगम अभी तक 3 करोड़ 11 लाख 79 हजार रुपये के कार्य करा चुका है। वहीं पंजायतीराज विभाग से 75 लाख 84 हजार रुपये के विकास कार्य भी नगर निगम अभी तक करा चुका है।
इनमें सड़क, नाली बनवाने के साथ ही पाइप डलवाने और गलियों को इंटरलॉकिंग कराने के कार्य है। यह आंकड़ा भी कोई ओर नहीं बता रहा है, बल्कि यह सबकुछ नगर निगम के कागजों में दर्ज है।
लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि नगर निगम केवल ठेका दे देता है और उससे आगे की उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं रहती है।
इस कारण ही कई बार विकास कार्य कराते समय घटिया सामग्री तक लगा दी जाती है और यह सबकुछ उस हालात में चल रहा है, जब नगर निगम के पास विकास कार्य कराने के लिए सभी विंग है। उन विंग में इंजीनियर भी तैनात है, लेकिन उसके बावजूद दूसरे विभागों पर नगर निगम निर्भर है।