रोहतक। हरियाणा में कोख में बेटियों को मारने का जो लांछन लगा, उसे रोहतक जिले के लाढ़ौत और कटवाड़ा गांव की मांओं ने धो डाला है। पिछले सात सालों में इन गांवों में रिकॉर्ड 1000 बेटों पर 1200 से अधिक बेटियां पैदा हुई हैं। जिले के 16 अन्य गांव भी हैं, जहां बेटियों की जन्मदर 1000 से अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 से 2025 तक लाढ़ौत गांव में 1000 बेटों पर 1262 बेटियों ने जन्म लिया है। इसी तरह कटवाड़ा गांव में 1000 बेटों पर 1218 बेटियां जन्मी हैं।
हालांकि यह चुनिंदा गांवों के आंकड़े हैं। जिले में 86 गांव ऐसे भी हैं, जहां आज भी बेटियों की जन्मदर प्रति 1000 बेटों पर 900 से भी कम है।
शिक्षा और जागरूकता ने बदली सोच
सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र बताते हैं बेटियों की जन्मदर में अचानक या एक दिन में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके पीछे जागरूकता और परिवार की सकारात्मक सोच का बड़ा हाथ है। आज हर क्षेत्र में बेटियां सफलता का परचम लहरा रही हैं। अब हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके घर में कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका जैसी बहादुर बेटियां जन्में।
कम लिंगानुपात वाले गांवाें में चलेगा जागरूकता अभियान
कम लिंगानुपात वाले गांवों में स्वास्थ्य विभाग जागरूकता कार्यक्रम चलाने के साथ कठोर कदम उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में ऐसे गांवों में निगरानी के लिए डिप्टी सीएमओ की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। वे न सिर्फ लोगाें को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि भ्रूणलिंग जांच कराने वालों पर भी सख्ती कर रहे हैं। विभाग लगातार ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ भी कर रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जा रही है।
800 से कम लिंगानुपात वाले गांवों पर कड़ी रहेगी
-स्वास्थ्य विभाग ने जिले का लिंगानुपात सुधारने की दिशा में एक कदम और बढ़ाया है। इसी कड़ी में जिले के 800 से कम लिंगानुपात वाले गांवों में डिप्टी सीएमओ की ड्यूटी लगाई गई है। वह इन गांवों पर नजर रखेंगे और जागरूकता के प्रयास के अलावा सुधार के अन्य कदम भी उठाएंगे।
-डॉ. रमेश चंद्र, सिविल सर्जन।